हरियाणा के 4248 गांवों की फसल बिक्री पर पेंच फंस गया है। मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर दी गई जानकारी में से 4 लाख 73 हजार एकड़ फसल के डाटा का मेल नहीं हो पा रहा है। किसानों ने जो जानकारी पोर्टल पर दी है और सरकार ने अपने तंत्र के माध्यम से जो जानकारी जुटाई उसमें अंतर है। इस घटनाक्रम के बाद फसल बिक्री के लिए किसानों का पंजीकरण पोर्टल पर नहीं हो पा रहा है।
प्रदेश में 5 जुलाई, 2019 को सरकार ने मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल की शुरुआत की थी। इस पोर्टल पर हर सीजन में किसान अपनी जमीन पर बोई गई फसलों की जानकारी देते हैं। इसी आधार पर सरकार फसलों की खरीद तय करती है। खरीफ सीजन में प्रदेश के 7.50 लाख किसानों ने 46.98 लाख एकड़ पर फसल बिजाई की जानकारी दी है।
प्रदेश सरकार द्वारा जब पोर्टल पर दी गई जानकारी को (भौतिक सत्यापन) फिजिकल चेक करवाया गया तो पोर्टल का डाटा और खेतों में खड़ी फसल का डाटा मेल नहीं खा रहा है। प्रदेश के सभी 22 जिलों के 4248 गांवों की 473119 एकड़ फसल का डाटा मिसमैच है। अब इन गांवों के किसानों के सामने फसलें बेचने में दिक्कत आ रही है। क्योंकि अब खरीद के लिए किसानों का पोर्टल पर पंजीकरण नहीं हो रहा है।
फिजिकल वेरिफिकेशन और सेटेलाइट में हुआ खुलासा
मेरी फसल मेरा ब्योरा पर दी जानकारी को वेरिफाई करने के लिए सरकार द्वारा तीन स्तर पर चेकिंग करवाई गई। पहला कृषि विभाग ने 1000 युवाओं को इसकी जांच का जिम्मा सौंपा, जिन्होंने एक–एक खेत में जाकर डाटा एकत्र किया। फिर राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी की गई और हरसेक (हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर) द्वारा सैटेलाइट के माध्यम से फसलों की मैपिंग की गई। इन तीनों एजेंसियों का डाटा और पोर्टल पर दिया गया ब्योरा नहीं मिल रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि काफी स्थानों पर किसानों ने खेतों में दूसरी फसल लगा रखी है, लेकिन पोर्टल पर धान आदि की जानकारी दी है। इसके अलावा, मिस मैच डाटा में शामलाती और सरकारी जमीन पर की गई बिजाई भी शामिल है।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल किसानों के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। सरकार ने तो कर्मचारियों को इसके लिए ट्रेंड किया है और न ही किसानों को इस बारे में कोई प्रशिक्षण दिया। इसे तुरंत प्रभाव से बंद कर देना चाहिए, साथ ही किसानों की फसल खरीद की तुरंत व्यवस्था की जानी चाहिए।
-रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू।
मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल पर किसानों द्वारा भरे गए डाटा को विभाग द्वारा चेक कराया गया है। फिजिकली और सैटेलाइट के माध्यम से डाटा का वेरिफिकेशन किया जा रहा है। मिसमैच डाटा को वैरिफाई करने के लिए सभी जिलों में अधिकारियों की ड्यूटी लगाई है। सही जानकारी देने वाले किसी किसान को परेशानी नहीं आएगी।
-जेपी दलाल, कृषि मंत्री, हरियाणा