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करनाल: किसान आंदोलन तो पहले से सक्रिय था, अब जीटी बेल्ट में लगा पहला स्थायी मोर्चा

Fri, 10 Sep 2021 02:21 AM IST
ajay kumar गगन तलवार, अमर उजाला, करनाल (हरियाणा)

सार

हरियाणा के करनाल में लघु सचिवालय के बाहर किसानों का धरना तीसरे दिन भी जारी रहा। यहां चार स्थानों पर 18 घंटे से लंगर चल रहा है। किसानों को बादाम से लेकर कोल्ड ड्रिंक और खीर व जलेबी परोसी जा रही हैं।
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करनाल में धरने पर बैठे किसान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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हरियाणा में किसान आंदोलन शुरू से सक्रिय है लेकिन यहां कोई पक्का मोर्चा नहीं लगा था। करीब 9 माह से दिल्ली की सीमाओं पर जिस तरह किसानों का धरना जारी है, वैसी ही झलक अब कर्णनगरी में लघु सचिवालय के सामने भी दिखने लगी है। किसान नेताओं के स्थायी मोर्चे के एलान के बाद हरियाणा के साथ-साथ यूपी और पंजाब के किसान भी मोर्चे पर डटने लगे हैं। दो दिनों तक लघु सचिवालय के अलावा सेक्टर-12 मार्केट के शोरूम और बैंकों का कामकाज भी बंद रहा। 

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बुधवार को तंबू गाड़ने के बाद अब गुरुवार को खाद्य सामग्री और अन्य सुविधाओं के लिए भी छोटे-छोटे कैंप बनने लगे हैं। दिल्ली सीमाओं पर चल रहे आंदोलन की तर्ज पर यहां भी 18 घंटे चार स्टालों पर अटूट लंगर बरताया जा रहा है। लस्सी और कोल्ड ड्रिंक से लेकर बादाम, खीर और जलेबी तक परोसी जा रही है। 

28 अगस्त को बसताड़ा टोल प्लाजा पर किसानों पर हुए लाठीचार्ज के बाद से आंदोलन में नया मोड़ आया है, जिसके बाद पहली बार हरियाणा में किसानों का दिल्ली की सीमाओं की तर्ज पर स्थायी मोर्चा लगा है। मंगलवार की पहली रात को किसान बिना टेंट सड़क पर दरी पर सोए, जबकि दूसरे दिन बुधवार को सुबह ही टेंट लगाकर यहां व्यवस्था बना ली गई। अब अन्य इंतजाम किए जा रहे हैं। तीन दिनों से चल रहे घेराव में किसानों के खाने की व्यवस्था गुरुद्वारों की ओर से की गई।
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करीब 8 हजार लोगों के लिए गुरुद्वारों से लंगर भेजा जा रहा है। इसके अलावा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, अमृतसर की ओर से भी व्यवस्था की गई है। वहीं अब लंगर पकाने की व्यवस्था धरनास्थल पर भी की गई है। महिलाएं यहां सब्जी आदि काटने के साथ साथ लंगर पकाने की भी सेवा कर रही हैं। इधर, किसान नेताओं का दावा है कि आगे उनकी ओर से भी लंगर की व्यवस्था की जाएगी। 
 
सचिवालय का रास्ता प्रशासन ने बंद किया 
दो दिनों से प्रशासन ने खुद फोर्स लगाकर सचिवालय का गेट बंद किया है। जबकि हम सड़क पर बैठे हैं। किसानों ने न पहले रास्ते बंद किए और न आगे करेंगे। दुकानों का भी ध्यान रखेंगे। प्रशासन और सरकार मांगे मानने को तैयार नहीं हैं। - योगेंद्र यादव, किसान नेता।

किसान नहीं मान रहे हमारे प्रस्ताव

अब तक हुई बैठकों में प्रशासन ने यह प्रस्ताव रखा कि अफसरों व किसानों की संयुक्त कमेटी बनाई जाए, जो दोषी निकलेगा उस पर कार्रवाई होगी। इस प्रस्ताव को भी आंदोलनकारियों ने दरकिनार कर दिया। जिले में सभी कार्य सामान्य रूप से चलते रहेंगे। जीटी रोड सहित जिले की सभी सड़कें और सरकारी कार्यालयों में कार्य शुरू है। कानून व्यवस्था भी नहीं बिगड़ने देंगे। - निशांत कुमार यादव, उपायुक्त।

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