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Chandigarh: किसानों की बहस में नहीं पहुंचे भाजपा नेता, अब 22 मई को पंजाब-हरियाणा सीमा पर ताकत दिखाएंगे किसान

Tue, 23 Apr 2024 12:55 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

भाजपा के पांच बड़े नेताओं की कुर्सियां लगाई थीं। 1 मई को मजदूर दिवस मनाने का भी फैसला लिया गया है।
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किसान भवन में लगी भाजपा नेताओं की कुर्सियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) ने भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को खुली बहस के लिए आमंत्रित किया था। इसके लिए मंगलवार सुबह 11 से 3 दोपहर बजे का समय तय किया गया था। भाजपा के नेता इस बहस में नहीं पहुंचे, जिसके चलते किसान नेताओं ने अपनी आगे की रणनीति का एलान कर दिया है।

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संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 22 मई को किसान आंदोलन 2.0 को 100 दिन पूरे हो रहे हैं। इस दिन पंजाब, हरियाणा की दोनों सीमाओं पर भारी संख्या में किसान इकट्ठे होंगे और जनसभाएं करेंगे। पूरे प्रदेश से किसान इन जनसभाओं में हिस्सा लेने के लिए पहुंचेंगे। इसके अलावा 1 मई को दोनों मोर्चों पर मजदूर दिवस मनाने का भी फैसला लिया गया है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि पंजाब भाजपा अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने किसानों से खुली बहस के लिए आह्वान किया था। उनकी इस चुनौती को किसान नेताओं ने स्वीकार करते हुए भाजपा नेताओं को बहस के लिए आमंत्रित किया था।
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इसके लिए 23 अप्रैल को सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक का समय किसान भवन में तय किया गया था। पंजाब भाजपा अध्यक्ष जाखड़ की चुनौती स्वीकार करने का मकसद भाजपा के झूठे प्रचार की पोल खोलना था। मंगलवार को किसान नेता तय समय पर किसान भवन पहुंच गए, लेकिन कोई भी भाजपा नेता नहीं पहुंचा। भाजपा नेताओं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, जेपी नड्डा और सुनील जाखड़ के लिए आरक्षित सीटें खाली रह गईं।

डल्लेवाल ने कहा कि भाजपा नेताओं का आज किसानों से बहस की बात कहकर खुद खुली चर्चा में न आना यह साबित करता है कि भाजपा सरकार किसान मजदूरों के सवालों का सामना करने को तैयार नहीं है। भाजपा सरकार के 10 साल के कार्यकाल में लगातार किसान-मजदूरों के खिलाफ फैसले लिए गए, जिसके कारण आज बीजेपी नेता चुनाव में सवालों से भाग रहे हैं। जब शहरों और गांवों में किसान सवाल पूछते हैं तो बीजेपी नेता यह कहकर भाग जाते हैं कि ये नीतिगत मामले ऊपरी नेतृत्व से जुड़े हैं।

डल्लेवाल ने कहा कि भाजपा सरकार एमएसपी की कानूनी गारंटी से, लखीमपुर के किसानों को न्याय जैसी मांग मानने से पीछे हट गई है। इस आंदोलन के दौरान सरकार ने हरियाणा के किसानों की रिहाई की मांग भी मानने से इन्कार कर दिया और अब ये नेता बहस से भी भाग गए।

किसान नेताओं ने आगे भी भाजपा को चैलेंज दिया है कि आप जगह और समय तय कर लें, हम आगे भी बहस के लिए तैयार हैं। इस मौके पर किसान नेता सुरजीत सिंह फूल, मंजीत सिंह राय, गुरअमनित सिंह मांगट, अभिमन्यु कोहाड़ और सुखजीत सिंह खैरा आदि नेता मौजूद थे।

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