शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे किसान संगठनों का दिल्ली कूच एक दिन के लिए और टल गया है। इससे पहले किसान संगठनों ने 29 फरवरी तक कूच रोकने का निर्णय लिया था। किसान नेता सरवण सिंह पंधेर और जगजीत सिंह डल्लेवाल ने गुरुवार को शंभू बॉर्डर पर साझा बैठक के बाद प्रेस वार्ता में कहा कि शुक्रवार को इस मुद्दे पर फिर बैठक होगी और आगे की रणनीति का एलान किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा और फिलहाल किसान बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे। वहीं, खनौरी बॉर्डर पर पुलिस टकराव में जान गंवाने वाले बठिंडा के युवा किसान शुभकरण सिंह का गुरुवार को उनके पैतृक गांव बल्लो में अंतिम संस्कार कर दिया गया। मृतक की दोनों बहनों ने अपने भाई के सिर पर सेहरा बांध कर अंतिम विदाई दी, जबकि पिता ने मुखाग्नि दी।
21 फरवरी को शुभकरण की खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर हरियाणा पुलिस के साथ टकराव के दौरान मौत हो गई थी। अंतिम संस्कार के मौके किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल, सरवण सिंह पंधेर व जोगिंदर सिंह उगराहां के अलावा आप, कांग्रेस व शिअद के नेता भी मौजूद रहे। डल्लेवाल ने कहा कि तीन मार्च को सभी संगठन शुभकरण के भोग पर उनके गांव बल्लो पहुंचेंगे।
अंतिम संस्कार से पहले खनौरी लाया गया शुभकरण का शव
शुभकरण के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार से पहले खनौरी-दातासिंह वाला बॉर्डर पर लाया गया, जहां हजारों किसानों ने उन्हें श्रद्धाजंलि दी। यहां कुछ देर दर्शनों के बाद शव को पैतृक गांव बल्लो के लिए रवाना कर दिया गया। बठिंडा में अंतिम संस्कार के दौरान लोगों ने केंद्र व हरियाणा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। गांव में भारी पुलिस बल मौजूद रहा। डल्लेवाल और पंधेर ने कहा कि शुभकरण की शहादत ने आंदोलन को नई दिशा दी है। अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करना काफी नहीं है।
सरकारी नौकरी व परिवार को एक करोड़ देगी सरकार
पंजाब सरकार शुभकरण की एक बहन को सरकारी नौकरी और परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता राशि देगी। परिवार के पास ढाई एकड़ जमीन है और परिवार पर लाखों रुपये का कर्ज है। परिवार ठेके पर जमीन लेकर खेती करता है। मृतक के पिता बकरी चराने का काम करते हैं। शुभकरण की मां 17 वर्ष पहले ही पति को छोड़कर चली गई थी।