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Chandigarh: कला समीक्षक और आर्ट हिस्टोरियन प्रो. बीएन गोस्वामी का निधन, प्रशासनिक सेवा छोड़ उतरे थे शोध में

Fri, 17 Nov 2023 12:19 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रो. बीएन गोस्वामी का जन्म 15 अगस्त 1933 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत (वर्तमान में पाकिस्तान में) के सरगोधा में जिला एवं सत्र न्यायधीश रहे बीएल गोस्वामी के घर हुआ था। प्रांत के विभिन्न स्कूलों में प्रारंभिक स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई हिंदू कॉलेज अमृतसर से की
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कला समीक्षक और आर्ट हिस्टोरियन प्रो. बीएन गोस्वामी - फोटो : फाइल
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चंडीगढ़ के प्रसिद्ध कला समीक्षक और आर्ट हिस्टोरियन प्रो. बीएन गोस्वामी का शुक्रवार को उनके निवास पर निधन हो गया। उनके निधन से कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। पंजाब ललित कला अकादमी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है। गोस्वामी पीजीआई में दाखिल थे। देर रात तीन बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

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प्रो. बीएन गोस्वामी का जन्म 15 अगस्त 1933 को ब्रिटिश भारत के पंजाब प्रांत (वर्तमान में पाकिस्तान में) के सरगोधा में जिला एवं सत्र न्यायधीश रहे बीएल गोस्वामी के घर हुआ था। प्रांत के विभिन्न स्कूलों में प्रारंभिक स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई हिंदू कॉलेज अमृतसर से की और 1954 में पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से मास्टर डिग्री हासिल की। वह 1956 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और बिहार कैडर में काम करने के बाद दो साल के लिए उन्होंने कला में अपनी पढ़ाई जारी रखने के लिए 1958 में सेवा से इस्तीफा दे दिया। 

इसके बाद वह पंजाब विश्वविद्यालय लौट आए और 1961 में डॉक्टरेट की डिग्री (पीएचडी) प्राप्त करने के लिए प्रसिद्ध इतिहासकार हरि राम गुप्ता के मार्गदर्शन में निचले हिमालय की कांगड़ा चित्रकला और इसकी सामाजिक पृष्ठभूमि पर शोध किया। यह बताया गया है कि उनके परीक्षक आर्थर लेवेलिन बाशम, इंडोलॉजिस्ट और कला समीक्षक, डब्ल्यू.जी. आर्चर थे।
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अपने शोध के दौरान, वह कला इतिहास संकाय के सदस्य के रूप में पंजाब विश्वविद्यालय में शामिल हो गए, जहां उन्होंने अपना पूरा कॅरिअर बिताया और एक प्रोफेसर के रूप में सेवानिवृत्त हुए। वहां काम करते हुए उन्होंने एक ब्रेक लिया और 1973 से 1981 तक हीडलबर्ग विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई संस्थान में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में काम किया। उन्होंने कैलिफोर्निया, बर्कले, पेंसिल्वेनिया और ज्यूरिख जैसे कई अन्य अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में भी काम किया। 
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पंजाब विश्वविद्यालय में उन्होंने इसके निदेशक के रूप में ललित कला संग्रहालय विकसित किया। अपने शैक्षणिक कॅरियर के अलावा उन्होंने सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग (सीसीआरटी) के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया, जो भारत सरकार के तहत एक नोडल एजेंसी है। वह भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (आईसीएचआर) की गवर्निंग कमेटी के सदस्य भी रहे और चंडीगढ़ ललित कला अकादमी की अध्यक्षता कर चुके हैं। गोस्वामी का विवाह कला इतिहासकार, शिक्षाविद और पंजाब विश्वविद्यालय की पूर्व प्रोफेसर करुणा से हुआ। दंपती का एक बेटा और एक बेटी, अपूर्वा और मालविका हैं। वह चंडीगढ़ के सेक्टर में 19 में रहते थे।

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