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Chandigarh News: हीराक्षी के परिजनों और इशिता को नहीं मिला मुआवजा, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Sun, 01 Oct 2023 08:52 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

रिपोर्ट में कमेटी ने साफ कहा कि हादसा इंजीनियरिंग विभाग की चूक के कारण हुआ क्योंकि अधिकारियों ने मौके का दौरा नहीं किया और पेड़ों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशिष्ट प्रोटोकॉल तैयार नहीं किया गया और जरूरत पड़ने पर उपचार किया जाना चाहिए था।
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इशिता और हीराक्षी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में हेरिटेज पेड़ के गिरने से हुई नौवीं कक्षा की छात्रा हीराक्षी की मौत और छात्रा इशिता के बाजू गंवाने के मामले में प्रशासक की ओर से बनाई गई कमेटी की सिफारिश के बावजूद मुआवजा न मिलने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने याचिका पर यूटी प्रशासन समेत अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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याचिका दाखिल करते हुए पीड़िता इशिता व मृतका हीराक्षी के पिता ने हाईकोर्ट को बताया कि बीते वर्ष आठ जुलाई को कार्मल कॉन्वेंट स्कूल में एक पीपल के वृक्ष नीचे बैठकर छात्राएं लंच कर रहीं थीं। पेड़ के बगल में प्रशासन ने एक बोर्ड लगाया था, जिसमें उसे विरासती पेड़ का दर्जा दिया गया था। उस दिन पेड़ का एक बड़ा हिस्सा जमीन से उखड़कर छात्राओं पर गिर गया। इसके चलते नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली हीराक्षी को जान गंवानी पड़ी। वहीं, छात्रा इशिता की जान बचाने के लिए उसके हाथ को काटना पड़ा। याची ने कहा कि इस हादसे के बाद प्रशासन, नगर निगम व स्कूल इसके लिए एक दूसरे को जिम्मेदार ठहराने लगे। मामला हाईकोर्ट पहुंचने पर प्रशासक के आदेश पर कमेटी का गठन किया गया था।

सेवानिवृत्त जस्टिस जितेंद्र चौहान ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए हादसे के लिए यूटी प्रशासन और खास तौर पर इंजीनियरिंग विंग को जिम्मेदार ठहराया था। इसके साथ ही हीराक्षी के परिजनों को एक करोड़ रुपये और हादसे में बाजू गंवाने वाली इशिता को 50 लाख रुपये मुआवजा देने की सिफारिश की थी। याचिका में बताया गया है कि इस रिपोर्ट को सौंपे हुए छह माह से भी अधिक का समय बीत गया है, बावजूद अब तक पीड़ितों को मुआवजा जारी नहीं किया गया है। ऐसे में प्रशासन को आदेश दिया जाए कि यह मुआवजा राशि जारी करे। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर यूटी प्रशासन व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

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क्या है मामला

8 जुलाई 2022 को सुबह करीब 11:55 बजे कार्मल कॉन्वेंट स्कूल के परिसर में विरासती पीपल के पेड़ के नीचे छात्राएं बैठकर लंच कर रहीं थीं, तभी अचानक पेड़ का एक बड़ा हिस्सा जड़ से उखड़कर उन पर आ गिरा। स्कूल प्रबंधन ने तुरंत हादसे की सूचना पुलिस को दी। आनन-फानन स्कूल प्रबंधन और विद्यार्थियों ने पेड़ के नीचे दबी छात्राओं को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। हीराक्षी, इशिता और बस कंडक्टर शीला को सेक्टर-16 के अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। 

पीजीआई में डॉक्टरों ने हीराक्षी को मृत घोषित कर दिया जबकि शीला और इशिता की हालत गंभीर थी। बाद में इशिता के हाथ को काटना पड़ा जबकि अटेंडेंट शीला को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ा। बाद में इस मामले की जांच के लिए प्रशासक ने सेवानिवृत्त जस्टिस जितेंद्र चौहान की अध्यक्षता वाली एक सदस्यीय कमेटी का गठन किया। कमेटी ने छह महीने बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी और पीड़ितों को मुआवजा देने की सिफारिश की।

कमेटी ने कहा- हादसा इंजीनियरिंग विभाग की चूक से हुआ

रिपोर्ट में कमेटी ने साफ कहा कि हादसा इंजीनियरिंग विभाग की चूक के कारण हुआ क्योंकि अधिकारियों ने मौके का दौरा नहीं किया और पेड़ों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए विशिष्ट प्रोटोकॉल तैयार नहीं किया गया और जरूरत पड़ने पर उपचार किया जाना चाहिए था। प्रशासन ने इसमें जवाब दिया कि किसी स्पष्ट दिशा निर्देश के अभाव में इंजीनियरिंग विभाग निजी संस्थानों के परिसर में प्रवेश नहीं कर सकता। भविष्य में ऐसे हादसों को टालने के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए गए।

कमेटी ने दिए थे ये सुझाव
  • एक ग्रीन बिग्रेड का निर्माण किया जाए
  • रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटी (आरडब्ल्यूए) के सदस्यों को जोड़ा जाए
  • परिपक्व पेड़ों का अल्ट्रासोनिक मूल्यांकन हो
  • सभी मृत और सूखे पेड़ों का व्यापक सर्वेक्षण किया जाए
  • जानमाल का नुकसान बने पेड़ों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाए जाए
  • हेरिटेज पेड़ों का नियमित निरीक्षण हो, यूकेलिप्टस के पेड़ों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाए
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