भाजपा प्रधान जेपी नड्डा से कुलदीप बिश्नोई ने की मुलाकात।
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हरियाणा कांग्रेस के बागी विधायक कुलदीप बिश्नोई भारतीय जनता पार्टी में जाने से पहले अपनी शर्तों को मनवाने में जुटे हैं। हालांकि, भाजपा ने अभी तक शर्तों को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। दो सप्ताह के भीतर पहले गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात के बाद रविवार को बिश्नोई ने फिर नड्डा और प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की है।
दरअसल, कुलदीप बिश्नोई अपने और बेटे भव्य बिश्नोई के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने की जुगत में हैं। बिश्नोई खुद के लिए हिसार से सांसद की टिकट चाहते हैं और बेटे के लिए आदमपुर से। दोनों ही शर्तों को लेकर बिश्नोई ने 10 जुलाई को अमित शाह और जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद बिश्नोई ने एक के बाद एक ट्वीट कर भाजपा नेताओं की तारीफ में कसीदे पढ़े थे लेकिन इसी बीच भाजपा नेता सोनाली फौगाट ने बिश्नोई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है कि वह किसी भी सूरत में आदमपुर हलका नहीं छोड़ेंगी।
पिछली बार भाजपा की टिकट पर फौगाट बिश्नोई से हार गई थीं। दूसरा, चौधरी बीरेंद्र सिंह के बेटे बिजेंद्र सिंह हिसार से सांसद हैं। ऐसे में हिसार से टिकट को लेकर भी पेंच फंसा हुआ है इसलिए बिश्नोई भाजपा में शामिल होने से पहले पार्टी से अपनी सभी चीजें साफ करना चाहते हैं। बिश्नोई चाहते हैं कि वह जब पार्टी में शामिल होंगे तो सारी चीजें सार्वजनिक हों और उनके रास्ते से सभी रोड़े हट जाएं।
फिलहाल भाजपा के नेताओं ने बिश्नोई का पार्टी में स्वागत किया है लेकिन कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया है। इसलिए वह बार-बार भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मिलकर सारी स्थितियों पर चर्चा कर रहे हैं। रविवार को उन्होंने दिल्ली में भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मुलाकात की और उनके साथ राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा की।
बिश्नोई ने कहा कि उन्होंने राज्य के मौजूदा राजनीतिक मुद्दों और हरियाणा के विकास कार्यों के बारे में महत्वपूर्ण चर्चा की। गौरतलब है कि आदमपुर के विधायक कुलदीप बिश्नोई को राज्यसभा चुनाव में क्रास वोटिंग के बाद कांग्रेस द्वारा सभी पार्टी पदों से हटा दिया गया था। इससे पहले, जब कांग्रेस ने चौधरी उदयभान को प्रदेशाध्यक्ष बनाया तो इससे बिश्नोई नाराज हो गए थे। क्योंकि उनको उम्मीद थी कि कमान उनको सौंपी जाएगी। इसके अलावा, संगठन में कहीं पर भी कुलदीप को जगह नहीं दी गई और न ही राहुल गांधी ने उनको मिलने का समय दिया था। फिलहाल बिश्नोई ने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है, अगर वह इस्तीफा देते हैं तो उपचुनाव होना है।