ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर्स (टीजीटी) की परीक्षा के क्वालिफाइंग अंकों में छूट दिए जाने से जुड़ी तीन याचिका कैट ने खारिज कर दिया। परीक्षा के क्वालिफाइंग अंकों में 5 प्रतिशत की छूट दिए जाने से जुड़ी याचिका खारिज करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने फैसले में कहा कि टीजीटी में पात्रता योग्यता (स्नातक या स्नातकोत्तर में) में अन्य पिछड़ी जातियों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों के लिए 5 प्रतिशत अंकों की छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
बता दें कि याचिकाकर्ताओं ने यूटी के शिक्षा विभाग को निर्देश देने की अपील की थी कि उन्हें शहर के स्कूलों में टीजीटी के पदों के लिए आयोजित परीक्षा में क्वालीफाइंग अंकों में .5 (आधा)प्रतिशत की छूट दी जाए।
हरियाणा के रेवाड़ी निवासी संजू बाला ने यूटी के शिक्षा विभाग के पात्रता मापदंड को अधिकरण में चुनौती देते हुए कहा था कि पात्रता नियम नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) के नियमों के अनुसार नहीं हैं। साथ ही कहा था कि जो आवेदक ओबीसी श्रेणी से संबंध रखते हैं उन्होंने शिक्षा विभाग के एक विज्ञापन के तहत टीजीटी के पदों के लिए आवेदन किया था।
संजू बाला ने दावा किया था कि उसने सीबीएसई से सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (सीटीईटी) पास किया हुआ है। संजू बाला के अतिरिक्त अन्य दोनों आवेदकों ने भी कहा था कि विज्ञापन में उम्मीदवारों के स्नातक परीक्षा में 50 प्रतिशत अंक जरूरी मांगे गए थे। उनके 49.5 अंक थे। ऐसे में उन्हें अयोग्य बताया गया था।
एनसीटीई की वर्ष 2011 की एक नोटिफिकेशन को आधार बनाते हुए कहा गया कि जिसने स्नातक की हो और प्राथमिक शिक्षा में 2 साल का डिप्लोमा किया हो और इसके अलावा टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट उत्तीर्ण किया हो, वह एनसीटीई नियम, 2002 के मुताबिक टीजीटी पद के योग्य है। बाला ने कहा कि विभाग ने खुद कहा था कि स्नातक में 50 प्रतिशत अंक जरूरी हैं।
साथ ही कहा कि एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार उन्हें क्वालिफाइंग अंकों में आधा प्रतिशत की छूट दी जानी चाहिए थी क्योंकि वह ओबीसी आवेदक हैं। वहीं कैट ने अपने फैसले में कहा कि संबंधित नोटिफिकेशन में ऐसा कुछ नजर नहीं आता कि एक जैसी परिस्थितियां सभी योग्यताओं परीक्षाओं में योग्यता अंकों में डील करती हों जिनमें स्नातक व स्नातकोत्तर शामिल हैं।