जिंदगी के मुश्किल हालातों से पार पाने वाले ही मंजिल पाने की हिम्मत रखते हैं। कठिनाई और दिक्कतों के पहाड़ भी ऐसे लोगों को आगे बढ़ने से नहीं रोक पाते। कुछ इसी तरह की शख्सीयत में शुमार हैं आर्यन ग्रुप ऑफ कालेज के चेयरमैन डा.अंशु कटारिया।
9वीं क्लास में पैसे की तंगी से स्कूल में दाखिला नहीं ले पाने वाले अंशु आज आर्यन ग्रुप के चेयरमैन हैं। ट्राइसिटी के हजारों युवाओं के लिए डा.अंशु ने सफलता की मिसाल पेश है कि लगन और मेहनत से हर मंजिल कदमों को चूमती है।
जिंदगी में मुश्किलों का दौर
अंशु का जन्म 1 जनवरी 1976 में मुक्तसर(पंजाब) में हुआ। पिता रोशन लाल कटारिया कालेज में इकोनॉमिक्स पढ़ाते थे। पिता ने बिजनेस में हाथ आजमाया, लेकिन काफी नुकसान उठाना पड़ा। अंशु ने पिता को हौसला दिया और स्कूल लेवल पर ही पिता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़े। मुक्तसर के गवर्नमेंट कालेज से बीकॉम और फिर पीयू के यूबीएस से एमकॉम की डिग्री हासिल की।
आर्थिक तंगी के कारण अंशु ने ट्यूशन पढ़ाने के साथ ही दुकान पर काम किया। लंबे संघर्ष के बाद 2007 में डा.अंशु ने चंडीगढ़-पटियाला हाईवे स्थित नेपरा गांव में आर्यन ग्रुप की नींव रखी। आर्यन इंस्टीट्यूट आज ट्राइसिटी के नामी शैक्षणिक संस्थानों में शुमार है।
31 की उम्र में आर्यन ग्रुप की नींव
डा.अंशु कटारिया ने केवल 31 साल की उम्र में आर्यन ग्रुप की नींव रख दी। करीब 200 स्टूडेंट से शुरू हुए इंस्टीट्यूट में अब कश्मीर से कन्याकुमारी से 2500 स्टूडेंट विभिन्न कोर्स कर रहे हैं। आर्यन ग्रुप के 20 एकड़ में 7 कालेज चल रहे हैं। अपनी इस सफलता का श्रेय वह अपनी पिता डीसी कटारिया और पत्नी डा.प्रवीण कटारिया को देते हैं।
डा.अंशु कहते हैं कि उन्होंने खुद पढ़ाई के लिए काफी संघर्ष किया है। ऐसे में वह युवाओं को कैरियर की सही राह दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने बताया कि 2013 में देश-विदेश की 500 से अधिक कंपनियां आर्यन ग्रुप की ओर से आयोजित जॉब फेस्ट में पहुंचे और सैकड़ों विद्यार्थियों को अच्छी नौकरी मिली।
जरूरतमंद स्टूडेंट को लाखों की स्कॉलरशिप
खुद गरीबी में दिन बिताने वाले डा.अंशु कटारिया हर साल जरुरतमंद स्टूडेंट को लाखों की स्कॉलरशिप देते हैं। उनके इस प्रोजेक्ट में देश की पहली आईपीएस अधिकारी किरण बेदी भी जुड़ी हुई हैं। सामाजिक कार्यो में काफी रुचि रखने वाले डा.अंशु कटारिया को देश के पूर्व राष्ट्रपति डा.अब्दुल कलाम, पंजाब सीएम प्रकाश सिंह बादल, राज्यपाल शिवराज पाटिल के हाथों सम्मानित हो चुके हैं। डा.अंशु ने बताया कि अगले सत्र से इंस्टीट्यूट 5 छात्राओं की पूरी फीस और 20 छात्राओं की 50 फीसदी माफ करेगा।