शहर के बाजारों में ही नहीं बल्कि पर्यटक स्थलों पर भी अतिक्रमण माफिया का कब्जा है। शहर के तीन प्रमुख पर्यटक स्थल हैं, जिनमें सुखना लेक, रोक गार्डन और रोज गार्डन शामिल हैं।
शहरवासियों के अलावा जो पर्यटक देश विदेश से भी आते हैं वह इन तीन स्थलों पर जरूर आता है, लेकिन प्रशासन, नगर निगम और पुलिस तीनों ही यहां पर अतिक्रमण हटाने में असफल हैं।
जबकि सुखना लेक पर तो शहर के कई वीआईपी और प्रशासन के अधिकारी भी शाम को सैर करने के लिए आते हैं, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती है। सिटको के कर्मचारियों की ओर से भी कुछ नहीं कहा जाता है।
पाथ पर लगती हैं फड़ियां
सुखना लेक के भीतर टिकट काउंटर के पास पाथ के किनारे ही फड़ियां लगनी शुरू हो जाती है। इस प्वाइंट पर ही सबसे ज्यादा भीड़ होती है। इसके साथ ही सुखना लेक के प्रवेश द्वार (बाहर) सड़क किनारे फड़ियां लगती हैं जिस कारण ग्राहकों के खड़े होने से कई बार आवाजाही भी बाधित होती है।
शनिवार और रविवार को सड़क किनारे अतिक्रमण ज्यादा बढ़ जाता है। जबकि सुखना लेक के भीतर ही पुलिस चौकी है और सड़क के बाहर ट्रैफिक पुलिस तैनात रहती है। ऐसा ही हाल रोक गार्डन और रोज गार्डन के बाहर का है।
कार्रवाई के लिए व्यापारी ही याद आते हैं
व्यापार मंडल के महासचिव नरेश महाजन का कहना है कि प्रशासन की ओर से पूरे शहर में व्यापारियों के खिलाफ वायलेशन की मुहिम चलाई हुई मामूली वायलेशन पर भी उनकी दुकानें सील की जा रही है जबकि किसी को भी बाजारों और पर्यटक स्थल पर लग रही फड़ियां दिखाई नहीं दे रही हैं।
सेक्टर-18 की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील चोपड़ा का कहना है कि शहर के सुखना लेक के अलावा अन्य पर्यटक स्थलों पर विदेशी भी आते है जब वह यहां पर आकर अतिक्रमण देखते है तो वह भी हैरान हो जाते है।
एसएसपी डा. सुखचैन सिंह गिल का कहना है कि जिस जगह पर अतिक्रमण होने से आवाजाही बाधित होती है इसके साथ ही पैदल चलने वाले लोगों को परेशानी होती है ऐसे स्थलों पर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ मामला भी दर्ज किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि पर्यटक स्थलों में हो रही अतिक्रमण को चेक करवाया जाएगा।
नगर निगम के अतिक्रमण हटाओ दस्ते के सुपरिंटेंडेंट कश्मीरा सिंह का कहना है कि सुखना लेक के अलावा अन्य पर्यटक स्थलों पर लग रही फड़ियों को समय समय पर उठाया जाता है उनका सामान भी जब्त किया जाता है। उनका कहना है कि इस अभियान को और तेज किया जाएगा।