पंजाब में विधानसभा चुनाव को लेकर लगी आचार संहिता का सियासतदान लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। पंजाब चुनाव आयोग को अब तक इन मामलों की 1500 से अधिक शिकायतें मिल चुकी हैं। जांच में 70 प्रतिशत सही मिली हैं। 30 प्रतिशत शिकायतें झूठी पाई गई हैं। पंजाब विधानसभा चुनाव में पहली बार आयोग सी-विजिल एप का प्रयोग कर रहा है।
वर्ष 2019 में चुनाव आयोग द्वारा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए सी-विजिल एप शुरू किया था। इसके बाद हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भी इस एप का प्रयोग चुनाव आयोग ने किया था। इस एप का प्रयोग आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत के लिए किया जाता है। पंजाब में भी चुनाव आयोग इस एप का प्रयोग कर रहा है।
चुनाव घोषणा के बाद अभी तक इस एप के जरिये लोग 1500 से अधिक शिकायतें आचार संहिता के उल्लंघन की कर चुके हैं। खास बात यह है कि चुनाव आयोग इस एप को मतदान के एक दिन बाद तक प्रभावी रखता है। इस चुनाव में राज्य के 23 जिलों से इस एप पर आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायतें आ रही हैं। इनमें से 70 प्रतिशत सही शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। लगभग 30 प्रतिशत ऐसी शिकायतें भी मिली हैं जिनमें आचार संहिता उल्लंघन का कोई मामला नहीं मिला। चुनाव आयोग के अधिकारी भी लोगों को इस एप के प्रति जागरुक कर रहे हैं।
गुप्त रहेगी शिकायतकर्ता की पहचान
सी-विजिल एप के जरिये शिकायत करने वाले लोगों की पहचान को गुप्त रखा जाता है। जीपीएस की मदद से शिकायत वाले स्थान की पहचान की जाती है। इसे अपने फोन में अपलोड करने की आसान प्रक्रिया है। स्मार्टफोन प्रयोग करने वाले इस एप को प्ले स्टोर से और आईफोन रखने वाले एप्पल स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।
ऐसे होता है एप पर काम
शिकायत दर्ज करने के बाद एक यूनिक आईडी शिकायतकर्ता को मिलती है, जिसके बाद वह आईडी के जरिये अब तक की जाने वाली कार्रवाई को ट्रैक कर सकता है। सबसे पहले शिकायत जिला नियंत्रण कक्ष में जाती है फिर इसे फील्ड में रहने वाले चुनाव कर्मियों को भेज दिया जाता है। इस पर नजर रखने के लिए पंजाब में डीसी आफिस और चुनाव आयोग कार्यालय चंडीगढ़ में नियंत्रण कक्ष बनाया गया है।