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नेहा शौरी हत्याकांड: फौजी पिता से विरासत में पाई थी बहादुरी, आठवां रैंक लाकर बनी थी ड्रग इंस्पेक्टर

Mon, 01 Apr 2019 10:54 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पंचकूला(हरियाणा)
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नेहा शौरी हत्याकांड
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जोनल लाइसेंसिंग अथॉरिटी डॉ. नेहा शौरी ने बहादुरी विरासत में पाई थी। गलत के खिलाफ खड़े होने का जज्बा उनमें अपने फौजी पिता से आया था। नेहा के पिता भी सेना में थे। वे नेहा को फौज के किस्से सुनाते रहते थे। सरकारी नौकरी करने के पीछे नेहा की सोच यही थी कि वह ज्यादा से ज्यादा लोगों की सेवा कर सके। लेकिन अफसोस फर्ज की राह पर चलते हुए उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। ये बातें बताते हुए नेहा के पिता और भाई निशांत की आंखें भर आईं।
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सेक्टर-12 निवासी निशांत शौरी ने बताया कि बहन के साथ बिताए पल चाहकर भी वहीं भुला नहीं सकता। नेहा ने चंडीगढ़ सेक्टर 16 स्थित मॉडल स्कूल से स्कूलिंग की थी। पीयू से फार्मासिस्ट की डिग्री ली थी। इसके बाद पंजाब पब्लिक सर्विस कमीशन के एग्जाम में आठवां रैंक प्राप्त करके ड्रग्स इंस्पेक्टर बनी। उन्होंने बताया कि नेहा प्रमोट होने वाली थी और वह असिस्टेंट कमिश्नर बनने वाली थीं। लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह ख्वाब साकार नहीं होंगे और वह हमें छोड़कर चली जाएगी।

एडमिशन के लिए भी नेहा ने लड़ी थी कानूनी जंग

डॉ. नेहा शौरी बचपन से ही संघर्षशील थीं। उन्होंने अपनी उच्चस्तरीय पढ़ाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्यूटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (नाइपर) से की थी, लेकिन नाइपर में दाखिले के लिए भी उन्होंने कानूनी जंग लड़ी थी। हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें वहां पर दाखिला मिल पाया था।

इसके बाद वह संस्थान की टॉप लिस्ट में रहीं। डॉ. नेहा ने नाइपर से एंटी कैंसर ड्रग डिलिवरी सिस्टम विषय पर मास्टर डिग्री हासिल की थी। संस्थान में दाखिले के लिए उसे हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी थी, क्योंकि पीयू ने उनका बीफार्मा का रिजल्ट घोषित नहीं किया था। ऐसे में संस्थान ने उसे एडमिशन देने से मना कर दिया था।

संस्थान में डॉ. नेहा शौरी का पढ़ा चुके प्रोफेसर डॉ. रजनीश ने बताया कि वह काफी होनहार स्टूडेंट थीं। मैं उसके काम करने के तरीके से प्रभावित था। जब उन्हें नेहा की मौत के बारे में पता चला तो काफी दुख हुआ। पेपर में उसकी तस्वीर देखकर ही पहचान लिया था।

जिक्र योग है कि डॉ. नेहा शौरी की  मोरिंडा निवासी बलविंदर सिंह ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बाद में आरोपी ने खुद को भी गोली मारकर जान दे दी थी। दोनों को पीजीआई ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।

मुझे बुआ से बात करनी है

नेहा की छह साल की भतीजी, जिसकी आंखों के सामने इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया, वह शव के पास खड़ी थी। वह बार-बार अपनी बुआ से बात करने की जिद कर रही थी। बोली- मुझे बुआ से बात करनी है। बुआ उठ क्यों नहीं रही हैं। मासूम बच्ची की ये बातें सुनकर परिजनों के साथ वहां मौजूद लोगों की आंखों में भी आंसू आ गए।

कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की आशंका
निशांत शौरी ने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग की आशंका जताई है। आरोप है कि जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया, उससे ऐसा लगता है कि इस घटना में डिपार्टमेंट के उच्चाधिकारी भी शामिल हो सकते हैं। क्योंकि शुक्रवार को नेहा ऑफिस में निर्धारित टाइम से काफी लेट गईं थीं। हत्यारोपी कैसे उनके पास पहुंच गया। इतना ही नहीं उसने चंद सेकेंड में वारदात को अंजाम दे दिया। जबकि पुलिस वाले कुछ और ही कहानी बना रहे हैं।

पुलिस ने परिवार को बताया, आरोपी था साइको
हत्याकांड की जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों का मानना है कि हत्यारोपी मानसिक तौर पर ठीक नहीं था। जबकि पुलिस के इस बयान पर परिवार के सदस्यों ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जब हत्यारोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी तो प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे असलहे का लाइसेंस कैसे जारी कर दिया। इतना ही नहीं उसकी बैक ग्राउंड भी क्रिमिनल थी।
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क्यों नहीं जमा करवाया गया हथियार

निशांत का आरोप है कि हत्यारोपी को आज से करीब 20 दिन पहले असलहे का लाइसेंस दिया गया। जबकि देश में आदर्श आचार चुनाव संहिता लागू है। ऐसे समय में  पुलिस और प्रशासन असलहा जमा करवा लेती है। फिर हत्यारोपी को लाइसेंस कैसे दे दिया गया और उसके हथियार को क्यों नहीं जमा करवाया गया। ये भी जांच का विषय है।

स्वास्थ्य मंत्री बोले, उच्चस्तरीय करवाएंगे जांच
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री ब्रह्म महिंद्रा परिवार को सांत्वना देने पंचकूला स्थित नेहा के निवास स्थान पर पहुंचे। वह घर पर करीब 17 मिनट रुके। इस दौरान उन्होंने परिवार के सदस्यों से बातचीत की और उन्हें विश्वास दिलाया कि नेहा के हत्यारोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। वह इस घटना की उच्च स्तरीय जांच करवाएंगे। उन्होंने कहा कि इस घटना को लेकर उन्होंने डीजीपी को भी फोन मिलाया था, लेकिन मीटिंग में होने के कारण बात नहीं हो पाई।
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