शिप्रा ने गरीब बच्चों को दिए पंख, अब शिक्षा के आसमान में भर रहे उड़ान
चंडीगढ़ के गांव और कालोनियों में रहने वाले कई गरीब लोग यह मान चुके थे कि महंगाई के इस दौर में शिक्षा उनके बच्चों के लिए नहीं है। बच्चे भी पढ़ाई छोड़कर स्कूल नहीं जाते थे। इन बच्चों को पढ़ाई से दूर होते देख शिप्रा आगे आईं और ऐसे बच्चों का भविष्य सुधारने का संकल्प लिया। उन्होंने इन बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाना शुरू किया। मेहनत रंग लाई। सेक्टर-25 स्थित यूआईटी कैंपस में परवाज फाउंडेशन की संस्थापक शिप्रा अपने साथियों के साथ धनास, डड्डूमाजरा, नयागांव सहित कई कालोनियों के बच्चों को पढ़ाती हैं। पांच बच्चों से शुरू हुआ यह सफर आज छठवीं से लेकर 12वीं तक के 500 बच्चों तक पहुंच गया है। सबकी अलग-अलग कक्षाएं लग रहीं हैं। इसमें शिप्रा को पीयू और उससे संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।
कोरोना काल में भी बच्चों की मदद की ताकि पढ़ाई न रुके
कोरोना काल में जब कक्षाएं ऑनलाइन चलने लगीं तब बच्चों के सामने एक बार फिर पढ़ाई का संकट खड़ा हो गया। जैसे-तैसे बच्चों ने मोबाइल तो खरीद लिया लेकिन इंटरनेट के लिए पैसे नहीं थी। ऐसे में शिप्रा के फाउंडेशन ने बच्चों को इंटरनेट की सुविधा मुहैया करवाई। इसके बाद इन बच्चों की ऑनलाइन कक्षाएं चलीं। खास बात यह रही कि शहर के बाहर के शिक्षकों ने भी आसानी से कक्षाएं लेकर बच्चों को पढ़ाया।
घरों में काम करने वाली महिलाओं को भी किया शिक्षित
कोरोना काल में जब कोठियों व घरों में काम करने वालीं महिलाओं के पास कोई काम नहीं था, तब शिप्रा और उनकी टीम ने इन महिलाओं को भी शिक्षित करने का काम किया। शिप्रा ने बताया कि 50 महिलाओं का एक बैच हमने शिक्षित किया। यह हमारे जीवन का सबसे अलग अनुभव था, क्योंकि एक महिला शिक्षित होती है तो पूरा परिवार शिक्षित होता है।