चंडीगढ़। नगर निगम पार्किंगों को स्मार्ट बनाने के लिए ठेकेदारों पर तो दबाव बना रहा है, लेकिन अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने की ओर ध्यान ही नहीं दे रहा। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में केबल डालने का काम किया जा रहा है। इसके लिए पार्किंगों में गड्ढा खोदकर केबल और पोल डाले हुए हैं। इसका जुर्माना पार्किंग में अव्यवस्था होने के कारण ठेकेदार पर लगा दिया गया। अब ठेकेदारों ने आवाज उठाना शुरू कर दिया है कि निगम पहले अपना काम भी तो पूरा करे।
शहर की 89 पेड पार्किंग को दो जोन में बांटकर रामसुंदर कंपनी और पाश्चात्य कंपनी को दिया गया। पिछले साल हुए इस फैसले के बाद कंपनी को छह माह में पार्किंग स्मार्ट करनी थी और उसके बाद शुल्क दोगुना करना था, लेकिन कोरोना महामारी के कारण समय सीमा बढ़ती गई। इस बीच निगम ने कंपनियों की लाइसेंस फीस भी माफ की। अब पार्किंगों को स्मार्ट करने का दबाव बनने पर ठेकेदार भी विरोध में आ गए हैं। कहीं पार्किंग की सड़क नहीं है तो कहीं केबल डालने के लिए गड्ढे खोदे गए हैं। कुछ जगह केबल और पोल भी रखे हैं। लोगों की शिकायत पर पार्किंग में अव्यवस्था का चालान ठेकेदारों का कट रहा है। वहीं लोगों का गुस्सा भी पार्किंग संचालकों पर निकल रहा है।
पहले चाइनीज उपकरण के कारण अटका मामला
अनुबंध में स्पष्ट लिखा है कि पार्किंग में चाइनीज उपकरणों का उपयोग नहीं करना है। कोरोना के कारण मामला अटका रहा, इस कारण पार्किंगों को स्मार्ट करने का मामला ठंडे बस्ते में चला गया। उसके बाद पार्किंग में एंट्री फीस पर भी सवाल उठे। इसके बाद निगम ने स्पष्ट कहा कि संचालक पार्किंग के बाहर पिक एंड ड्रॉप की जानकारी देंगे, लेकिन कुछ दिन चलकर यह काम भी चलता बना। अब लोगों की दोबारा शिकायत पर निगम गंभीर हुआ है।
कोट
हमने बुधवार को दोनों पार्किंग ठेकेदारों को बुलाया है। इस दौरान उनकी समस्याओं को सुनेंगे और दूर कराएंगे। वहीं पार्किंग को स्मार्ट करने की समय सीमा भी तय कराएंगे।
-एसके जैन, अतिरिक्त आयुक्त, नगर निगम