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हरियाणा के 11वें मुख्यमंत्री बने मनोहर लाल खट्टर, समझिए 'जजपा' से गठबंधन का गणित

Mon, 28 Oct 2019 09:17 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • 65 वर्षीय मनोहर लाल ने हरियाणा के 11वें मुख्यमंत्री के तौर पर दूसरी बार शपथ ली
  • जजपा सुप्रीमो दुष्यंत चौटाला ने भी बतौर उप मुख्यमंत्री शपथ ली 
  • शपथ ग्रहण समारोह चंडीगढ़ स्थित राज भवन में आयोजित किया गया
  • राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई
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मनोहर लाल, दुष्यंत चौटाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आखिरकार हरियाणा में दिवाली पर नई सरकार बन ही गई। त्योहार के दिन ही मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश के 11वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। उनके साथ जननायक जनता पार्टी (जजपा) सुप्रीमो दुष्यंत चौटाला ने बतौर उप मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण की क्योंकि इस बार भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार बनी है।

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ऐसे बनी सरकार- भाजपा विधायक- 40, जजपा विधायक- 10, निर्दलीय - 07, कुल- 57
भाजपा को समर्थन देने वाले निर्दलीय- बलराज कुंडू (महम), रणजीत चौटाला (रानियां), धर्मपाल गोंदर (नीलोखेड़ी), सोमवीर सांगवान (दादरी), रणधीर गोलन (पुंडरी), नयन पाल रावत (पृथला), राकेश दौलताबाद (बादशाहपुर)

शपथ ग्रहण समारोह चंडीगढ़ स्थित राज भवन में आयोजित किया गया। यह एक सादा समारोह रहा, जिसमें राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य ने मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह में दुष्यंत चौटाला के पिता अजय चौटाला, मां नैना चौटाला और भाई दिग्विजय चौटाला मौजूद रहे।

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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और बेटे अकाली दल सुप्रीमो सुखबीर बादल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हिमाचल के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला, हरियाणा भाजपा प्रभारी अनिल जैन, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और सांसद रतन लाल कटारिया समारोह में पहुंचे।

इनके अलावा भाजपा के कई दिग्गज नेता, सांसद, नए बने विधायक और निर्दलीय विधायक मौजूद रहे। समारोह में पंजाब के गवर्नर व यूटी प्रशासक वीपी सिंह बदनौर भी नजर आए।

कौन हैं मनोहर लाल...

मनोहर लाल खट्टर को गुलदस्ता भेंट करते जेपी नड्डा - फोटो : फाइल फोटो
मनोहर लाल हरियाणा के 11वें मुख्यमंत्री हैं और पंजाबी परिवार से हैं। वे हरियाणा के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो गैर जाट समुदाय से आते हैं। वे लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री के पद पर विराजमान होने वाले पहले गैर जाट नेता भी हैं। वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रह चुके हैं। हरियाणा की 13वीं विधानसभा में दूसरी बार करनाल का प्रतिनिधित्व करेंगे। 2014 में भी वे मुख्यमंत्री बने थे और पूरे पांच साल सरकार चलाई।

मनोहर लाल का जन्म 5 मई, 1954 में रोहतक के निदाना गांव में हुआ। मनोहर लाल के पिता का नाम हरबंस लाल था। वे 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के वक्त परिवार को लेकर रोहतक आ गए थे। परिवार की आर्थिक हालत ठीक न होने के कारण उनके पिता और दादा को मजदूरी तक करनी पड़ी। जैसे-तैसे करके पैसे इकट्ठे किए गए और जमीन खरीदकर खेतीबाड़ी शुरू की। मनोहर लाल खुद साइकिल पर सब्जियां बेचने के लिए जाया करते थे।

मनोहर लाल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंडित नेकी राम शर्मा गवर्नमेंट कॉलेज से की। उनके पिता उन्हें आगे पढ़ने देना नहीं चाहते थे। लेकिन मनोहर आगे पढ़ाई करके डॉक्टर बनना चाहते थे। हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे घरवालों से पैसे उधार लेकर दिल्ली चले आए और दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर मेडिकल की तैयारी करने लगे। मनोहर लाल ने तीन बार प्री मेडिकल दिया, पर क्लियर नहीं हो सकता।

मनोहर लाल 24 साल की उम्र में आरएसएस से जुड़ गए थे। 1979 इलाहाबाद में हुए विश्व हिंदू परिषद के समागम में पहुंचे और कई संतों और संघ के प्रचारकों से मिले। 1980 में उन्होंने ताउम्र आरएसएस से जुड़ने और शादी न करने का फैसला लिया। उनके इस फैसले का घरवालों ने काफी विरोध किया, पर वे नहीं माने। लगातार 14 साल गुजरात, हिमांचल, जम्मू कश्मीर जैसे 12 राज्यों में काम करने के बाद उन्हें 1994 में संघ की तरफ से एक्टिव राजनीति में आने का मौका मिला।

1995 में बीजेपी ने उन्हें हरियाणा का संगठन मंत्री बनाया। 1996 में उन्होंने बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी के साथ गठबंधन करके बीजेपी को सत्ता में हिस्सेदारी दिलाई। फिर जब देखा कि बंसीलाल सरकार की ठीक नहीं जा रही तो आलाकमान को सपोर्ट वापसी के लिए राजी किया। 2014 के विधानसभा चुनाव में करनाल सीट से उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड तोड़ मतों से जीत दर्ज करके 26 अक्टूबर 2014 हरियाणा के सीएम बने।

कौन हैं दुष्यंत चौटाला...

दुष्यंत चौटाला - फोटो : सोशल मीडिया
जननायक जनता पार्टी के अध्यक्ष दुष्यंत चौटाला, ताऊ देवी लाल के परिवार से हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पोते और ताऊ देवी लाल के पड़पोते हैं। दुष्यंत उचाना कलां से पहली बार विधायक बनकर उपमुख्यमंत्री बने हैं। दुष्यंत का यह दूसरा विधानसभा चुनाव था, लेकिन जीते पहली बार।

26 साल की उम्र में सबसे युवा सांसद बनने वाले कैलिफोर्निया स्टेट यूनिवर्सिटी से बिजनेस ग्रेजुएट हैं और वे नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से भी पढ़े हैं। चाचा अभय चौटाला से रार के बाद 10 महीने पहले ही उन्होंने जजपा का गठन किया, जो 2019 के विधानसभा चुनाव में 10 सीटें जीतकर किंगमेकर बनकर उभरी है।

2014 में दुष्यंत इनेलो की टिकट पर उचाना कलां से हार गए थे। उन्हें चौधरी बीरेंद्र की पत्नी प्रेमलता ने हराया था। इस बार जजपा के बैनर तले दुष्यंत उचाना से ही जीते और उन्होंने प्रेमलता को ही हराया है। वहीं भाजपा की गठबंधन सरकार में उप मुख्यमंत्री पद पाकर दुष्यंत ने उचाना की चौधर भी कायम कर दी है।

उनके दादा ओमप्रकाश चौटाला भी उचाना कलां से चुनाव लड़ते रहे हैं और जब चौधरी बीरेंद्र सिंह कांग्रेस में सीएम बनने की दौड़ में थे तो उन्हें बड़े चौटाला ने ही हराया था। इसके बाद बीरेंद्र सिंह कांग्रेस में बड़े नेता तो रहे पर मुख्यमंत्री की दौड़ में शामिल नहीं हो पाए।

अब दुष्यंत ने उपमुख्यमंत्री बनकर फिर बीरेंद्र परिवार को राजनीतिक झटका दिया है। दुष्यंत परदादा ताऊ देवी लाल की नीतियों पर ही आगे बढ़ रहे हैं। ताऊ हरियाणा के मुख्यमंत्री रहने के साथ ही 1989 से 1991 तक उपप्रधानमंत्री रह चुके हैं। उस समय जनता दल की सरकार बनी थी।

कुछ ऐसी रही हुड्डा की प्रतिक्रिया

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा बोले - आज शुभ दिन है, इसलिए भाजपा और जजपा की नई सरकार को मेरी शुभकामनाएं,। मैं उम्मीद करता हूं नई सरकार प्रदेश के विकास के लिए काम करेगी। हुड्डा ने जजपा पर भी तंज कसा और कहा कि जनता ने वोट किसी को दिया और जजपा ने सपोर्ट किसी और को दिया।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि जजपा ने जनादेश का सम्मान नहीं किया। जननायक जनता पार्टी ने जन भावना का अपमान किया है। जनता ने जजपा को भाजपा के खिलाफ वोट दी थी,
लेकिन मैं फिर भी शुभकामनाएं देता हूं कि नई सरकार चले। अब देखना यह होगा कि नई सरकार में भाजपा और जननायक जनता पार्टी में कितना तालमेल रहता है।

उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस संगठन में बदलाव पहले हुआ होता तो हरियाणा के चुनावी नतीजे कुछ और होते। उन्होंने कहा, चुनाव से 15 दिन पहले संगठन में बदलाव हुआ। बता दें कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस 90 में से 31 सीट जीतने में सफल रही।

अजय चौटाला ने बताया दिवाली का तोहफा

बेटे के उप मुख्यमंत्री बनने पर पिता अजय चौटाला काफी खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि एक पिता के लिए इससे बड़ी और क्या बात हो सकती है। यह मेरे लिए दिवाली का सबसे बड़ा तोहफा है, जो बेटे ने दिया। मुझे पूरी उम्मीद है कि दुष्यंत जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। पूरे पांच साल सरकार काम करेगी और प्रदेश की जनता इससे निराश नहीं होगी।

अजय चौटाला ने अपने बेटे दुष्यंत की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि दुष्यंत ने कई लोगों को उनकी हैसियत बता दी है। उसने मात्र 11 महीने पहले पार्टी बनाई थी। हम तो जेल में बंद हैं। अपनी मेहनत के दम पर उसने एक संगठन को खड़ा किया। साथियों के साथ मिलकर उसने जो काम किया, आज नतीजे आपके सामने हैं।

दुष्यंत मेरी सलाह के बगैर कोई फैसला नहीं लेता है। गठबंधन को लेकर भी उसने मुझसे बात की थी, इसके लिए मैंने सहमति दे दी।

मां नैना चौटाला और पत्नी ने भी खुशी जताई

बेटे को उपमुख्यमंत्री बनता देख उत्साहित दुष्यंत चौटाला की मां नैना चौटाला ने कहा कि हर मां-बाप बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे बुलंदी तक पहुंचे। दुष्यंत मेहनती हैं और यह उनकी मेहनत का ही फल है। मैं कभी भी उपमुख्यमंत्री की रेस में ही नहीं थी। मैं तो फिलहाल बाढड़ा से विधायक हूं और इसी में खुश हूं और विधायक रहते हुए ही में जनता की सेवा करती रहूंगी।

 जननायक जनता पार्टी कभी भी हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी के साथ गठजोड़ नहीं करेगी, वायरल हो रहे नैना चौटाला के इस वीडियो पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। यह जनादेश से पहले की बात है, उस वक्त हालात कुछ और थे और आज जजपा का भाजपा से पैचअप हो चुका है, इसलिए वायरल वीडियो पर मैं अब क्या बोल सकती हूं।

पति दुष्यंत चौटाला के उप मुख्यमंत्री बनने पर उन्हें शपथ लेता देख मेघना चौटाला भी खासी उत्साहित नजर आईं। मेघना चौटाला ने कहा कि दुष्यंत बहुत ही जिम्मेदार व्यक्ति हैं। उप मुख्यमंत्री बनने के बाद दुष्यंत अब प्रदेश की जनता के लिए और अच्छे से काम कर सकेंगे। हरियाणा की जनता को दुष्यंत से बहुत उम्मीदें हैं। मुझे भी उम्मीद है कि दुष्यंत उप मुख्यमंत्री की इस पारी में पूरी तरह सफल रहेंगे। जननायक जनता पार्टी ने बहुत संघर्ष किया है, यह उसी संघर्ष का परिणाम है।
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कई बार गड़बड़ा जाता है सियासी गणित
लोकसभा में मुद्दे कुछ और होते हैं, विधानसभा में स्थानीय मुद्दे हावी होते हैं। इसलिए कई बार सियासी गणित गड़बड़ा जाता है। भले ही इस बार हरियाणा के विधानसभा चुनाव में भाजपा को पूर्णबहुमत हासिल नहीं हुआ है, लेकिन नतीजों की यदि समीक्षा करें तो भाजपा का वोट प्रतिशत अपेक्षाकृत बढ़ा है। मगर अब हरियाणा में भाजपा और जननायक जनता पार्टी की सरकार बहुत अच्छे से काम करेगी। मनोहर लाल  के पास अब तो पिछले 5 साल का अनुभव भी है । उन्होंने अपना पिछला कार्यकाल बेदाग छवि के साथ पूरा किया है।  अब गठबंधन की नई सरकार से भी हरियाणा की जनता को बहुत उम्मीदें हैं।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखंड

अपना कार्यकाल पूरा करेगी सरकार
इसमें कोई दो राय नहीं है कि हरियाणा की नई सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी। इसके लिए मैं गठबंधन की इस नई सरकार को शुभकामनाएं और हरियाणा के लोगों को बधाई देता हूं।  सरकार अब पूरी तरह से मजबूत है और अब प्रदेश की जनता के लिए काम करेगी। इस कार्यकाल में भी हरियाणा विकास के नए आयामों को छुएगा।
-जयराम ठाकुर, मुख्यमंत्री, हिमाचल प्रदेश-

खुश हूं, देवीलाल का खून आगे बढ़ रहा है
मेरी निजी और सियासी जिंदगी में जो सबसे ज्यादा मेरे करीब रहे, वे थे मेरे अजीज दोस्त देवीलाल। देवीलाल पड़पौता अब दुष्यंत डिप्टी सीएम बना है, इसीलिए मैं शपथग्रहण समारोह में आया हूं। बहुत खुश हूं ये देखकर कि देवीलाल का खून सियासत में आगे बढ़ रहा है। भाजपा से हमारा गठजोड़ नहीं, बल्कि एक पवित्र रिश्ता है, हमारा लगाव है। मोदी ने आज देश-दुनिया में भारत का नाम बुलंद किया है। आतंकवाद पर जो नकेल कसी है, वह बहुत जरूरी थी। भाजपा-शिअद का संबंध हमेशा अटूट रहेगा।
-प्रकाश सिंह बादल, पूर्व मुख्यमंत्री पंजाब-

मेरा कंधा और मजबूत करने आए हैं पिता
हरियाणा में नए युग की शुरुआत हुई है।  हम मजबूती से सरकार चलाएंगे।  जेल मैनुअल कहता है कि आचार संहिता के दौरान किसी को फरलो नहीं दी जा सकती। अब क्योंकि आचार संहिता खत्म हो चुकी है तो नियमानुसार मेरे पिता अजय चौटाला को जेल से फरलो मिली है। मेरे पिता शपथ ग्रहण समारोह में मेरा कंधा और मजबूत करने आए हैं। इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। हरियाणा में अब दो प्रोग्रेसिव सोच वाले दलों ने सरकार बनाई है और मुझे उम्मीद है यह गठबंधन की सरकार प्रदेश के विकास में अहम योगदान देगी
- दुष्यंत चौटाला, उपमुख्यमंत्री

सैलजा पहले तंवर से निपट लें
गठबंधन की सरकार पर तंज कसने वाली कुमारी सैलजा सबसे पहले अपनी पार्टी तो देख लें और अपने बागी पूर्व अध्यक्ष अशोक तंवर से निपट लें। सरकार की चिंता वह छोड़ दें। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का भी पुराना अंदाज है, कुछ भी कह देते हैं। शपथ ग्रहण  समारोह में हुड्डा मेरे बगल में ही बैठे थे और मुझसे कह रहे थे कि नई सरकार का यह गठजोड़ अच्छा है। लेकिन बाहर जाते ही उनकी वाणी बदल गई और शुभकामनाओं के साथ वह नई सरकार के गठबंधन के खिलाफ बोलने लगे। हुड्डा को बता दूं भाजपा-जजपा  पूरी तरह से नेचुरल एलायंस है।
- रामबिलास शर्मा, पूर्व शिक्षामंत्री-
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