स्वर्ण जयंती के मौके पर हरियाणा विधानसभा सेशन
हरियाणा विधानसभा के विशेष सत्र में पंजाब के सीएम प्रकाश सिंह बादल की एसवाईएल के पानी की एक बूंद न देने की टिप्पणी भारी पड़ गई। लगभग डेढ़ घंटे तक सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सतलुज-यमुना लिंक पर जमकर बहस हुई।
मुख्य विपक्षी दल इनेलो ने खूब हंगामा और नारेबाजी की। कांग्रेस के भी एसवाईएल के विवाद में कूदने पर विपक्ष ने सरकार पर टिप्पणी के विरोध में निंदा प्रस्ताव पास करने का दबाव बनाया, जिसे आखिर सरकार को मानना पड़ा और बादल की टिप्पणी के खिलाफ एक लाइन का निंदा प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गया।
बीच में नौबत यहां तक आ गई कि इनेलो विधायक नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला की अगुवाई में अपना विरोध जताते हुए वेल तक पहुंच गए। स्पीकर के बार-बार आग्रह करने के बावजूद न मानने पर 15 विधायकों को नेम कर दिया गया। हालांकि, चौटाला के आपत्ति जताने पर गतिरोध खत्म करने के लिए स्पीकर कंवर पाल ने 11.22 बजे सदन की कार्यवाही पंद्रह मिनट के लिए स्थगित कर दी।
इस दौरान स्पीकर और सरकार के बीच चर्चा हुई व 11.37 बजे और पंद्रह मिनट के लिए डिप्टी स्पीकर संतोष यादव ने सदन की स्थगन अवधि को बढ़ा दिया। अभय चौटाला को बुलाकर नेम किए गए विधायकों को वापस बुलाने और उनके व विज के आपत्तिजनक शब्द काटने पर एक राय बनी। 11.52 बजे दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई व निंदा प्रस्ताव पास किया गया।
संयोग यह रहा कि जब निंदा प्रस्ताव पारित करने को लेकर सदन में हंगामा हो रहा था, उस पंजाब विधानसभा के स्पीकर चरणजीत सिंह अटवाल विधानसभा की कार्यवाही देखने के लिए दर्शक दीर्घा में मौजूद थे। निर्दलीय विधायक जयप्रकाश जेपी ने इनेलो नेताओं को मिली पंजाब की सिक्योरिटी व आवास वापस करने का भी मुद्दा उठाया।
इनेलो लाई काम रोको प्रस्ताव
विधानसभा सत्र
सदन में हंगामे की शुरुआत इनेलो के एसवाईएल व अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए काम रोको प्रस्ताव लाने से शुरू हुई। स्पीकर कंवर पाल ने इसे अस्वीकार कर दिया। इस पर इनेलो विधायक नारे लगाने लगे।
जवाब में बीजेपी की तरफ से भी भारत माता की जय के नारे लगे। शोरगुल के बीच अभय चौटाला की कैबिनेट मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, रामबिलास शर्मा, ओपी धनखड़ और अनिल विज के साथ तीखी बहस हुई। विधायक भी माहौल गरमाने में पीछे नहीं रहे।
दूसरे प्रदेश के सीएम की बात ब्रह्म वाक्य नहीं : मनोहर लाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने के बाद प्रेजीडेंशियल रेफ्रेंस पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कराई। ये दस-बारह साल से लंबित था। एसवाईएल पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। उसके निर्णय की अहमियत है।
संविधान के अनुसार चलने वाली सरकार उसे मानने से इंकार नहीं कर सकती। दूसरे प्रदेश का सीएम कुछ कहेगा तो उसे ब्रह्म वाक्य नहीं माना जा सकता।
पीएम मोदी को भेजो निंदा प्रस्ताव : अभय चौटाला
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नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रकाश सिंह बादल की टिप्पणी से क्या सरकार सहमत है, अगर नहीं तो चर्चा होनी चाहिए। निंदा प्रस्ताव पारित कर पीएम नरेंद्र मोदी को भेजा जाए। टिप्पणी के दौरान भाजपा के जो भी शीर्ष नेता मंच पर थे, वे उनकी भी निंदा करते हैं।
बादल के बयान से पैदा हुई नई परिस्थिति : हुड्डा
पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि एसवाईएल गंभीर विषय है। पंजाब के सीएम के बयान से नई परिस्थिति पैदा हुई है। इसके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित हो। अन्यथा वे चेतावनी देते हैं कि बादल अगर ऐसी बात करेंगे तो हरियाणा से गुजरने वाले पंजाब के ट्रक व बिजली रोक दी जाएगी। बादल उनके बुजुर्ग हैं, वह उनकी इज्जत करते हैं, लेकिन वह देश को तोड़ने की बात कर रहे हैं।