पंजाब की ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। पंजाब के गांवों के औषधालय पिछले 5 महीनों से आवश्यक दवाओं से महरूम चल रहे हैं। इसमें हैरान करने वाली बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग के पास दवाओं की आपूर्ति के लिए 10 करोड़ रुपये अनुदान होने के बाद भी लापरवाही बरती गई।
सरकारी औषधालयों में आवश्यक दवाओं की अंतिम आपूर्ति अप्रैल 2020 में कोरोना संक्रमण के प्रकोप से ठीक पहले की गई थी। तब से दवाओं की आपूर्ति दो बार की गई। एक बार नवंबर 2021 में 15 विषम दवाओं के साथ और फिर जनवरी 2022 में 20 दवाओं के एक पैकेट को औषधालयों में भेजा गया। इस आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को सिर्फ एक महीने तक ही सुचारु रखा जा सका। इसके बाद अब फिर से पांच महीने बीत चुके हैं लेकिन ग्रामीण औषधालयों में एक भी दवा की आपूर्ति विभाग द्वारा नहीं की गई है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं आवश्यक दवाओं के बिना ही संचालित की जा रही हैं। ग्रामीण लोगों को मजबूरी में महंगे निजी चिकित्सकों के पास जाना पड़ रहा है। हालांकि नई सरकार के मंत्री इसके लिए तत्कालीन सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और यह दावा कर रहे हैं कि जल्द ही ग्रामीण औषधालयों में दवाओं की आपूर्ति सुचारु की जाएगी।
15 साल पहले पंचायत विभाग को हुए थे हस्तांतरित
ग्रामीण आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 15 साल पहले 1186 ग्रामीण औषधालयों को स्वास्थ्य विभाग से ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को हस्तांतरित किया था। हालांकि ग्रामीणों का उसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
10 करोड़ अनुदान का नहीं हुआ प्रयोग
दवा खरीदने के लिए 10 करोड़ रुपये का अनुदान होने के बावजूद, सरकार लगभग दो वर्षों तक ग्रामीण औषधालयों को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति करने में विफल रही, जिससे ग्रामीणों को नुकसान उठाना पड़ा। अब जो अनुदान अनुपयोगी रहा, समाप्त हो गया है।
मामला मेरी जानकारी में है, लेकिन पिछली सरकार की सुस्ती के कारण अनुदान समाप्त हो गया। अब हम फिर से वित्त विभाग से राशि की मांग करेंगे।
- कुलदीप धालीवाल, ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री, पंजाब सरकार
सरकार को ग्रामीण आबादी को दवाओं से वंचित करने के लिए संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए। यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ग्रामीण औषधालयों को दवाओं की आपूर्ति तुरंत की जाए। - डॉ. दीपिंदर भसीन, अध्यक्ष, ग्रामीण चिकित्सा अधिकारी संघ