सावन माह के दूसरे सोमवार को चंडीगढ़ समेत ट्राइसिटी के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी। भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने के लिए सभी शिवालयों में लंबी लाइनें लगी रहीं।
कुएं के जल से होता है बाबा भोले का जलाभिषेक
चंडीगढ़ सेक्टर-24 के शिवालय खेमपुरी में भगवान शिव का जलाभिषेक कुआं के जल से होता है। यह कुआं भी बहुत प्राचीन है। इसके जल को संरक्षित किया गया है। इसका पानी शुद्ध है। हर रोज कुएं की पूजा होती है।
शिवालय खेमपुरी के प्रबंधक गोविंद हरि ने बताया कि चंडीगढ़ बनने से पहले यह कैलड़ गांव था। मंदिर में यहां पर स्वयंभू शिवलिंग हैं। यह बहुत ही प्राचीन मंदिर है। मंदिर में सुबह सबसे पहले पुजारियों के द्वारा अभिषेक करवाया जाता है। सुबह का जलाभिषेक भक्त करते हैं और शाम को अभिषेक व शृंगार यजमानों की ओर से किया जाता है।
गोविंद हरि ने बताया कि स्वयंभू शिवलिंग की मान्यताएं दूर दूर तक हैं। चंडीगढ़ के बसने से पहले यहां पर शिवालय था। यहां पर भारी संख्या में भक्त दूर-दूर से जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। शाम को रुद्राभिषेक और भव्य शृंगार होता है।
मंदिर परिसार में पूजा के लिए कई पेड़ पौधे...
भगवान शिव की पूजा के लिए मंदिर परिसर और उसके बाहर बेल के पौधे लगाए गए हैं। इसके अलावा शम्मी, रुद्राक्ष, लाल चंदन, परिजात और हार शृंगार के पौधे भी हैं।
मंदिर में शिवालय के अलावा राम परिवार, श्री लक्ष्मी नारायण, सीतला माता, सरस्वती माता, संतोषी माता की प्रतिमा भी है। इन्हें भक्त दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में प्राचीन त्रिवेणी इसमें बरगद, पीपल और नीम का पेड़ है। इसकी रोज पूजा होती है।