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Lok Sabha Election 2024: डेरों के इर्द गिर्द घूमती पंजाब की राजनीति, रखते हैं परिणामों को पलटने की क्षमता

Tue, 02 Apr 2024 01:49 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

डेरों की राजनीतिक ताकत पंजाब के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली तक फैली हुई है। चुनाव के दौरान ये डेरे पंजाब विधानसभा के 70 और हरियाणा के लगभग 32 निर्वाचन क्षेत्रों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। डेरों के एक इशारे पर रातों-रात चुनावी समीकरण बदल जाता है। कुछ डेरों ने प्रत्यक्ष तो शेष ने परोक्ष तौर पर बाकायदा अपने राजनीतिक विंग बनाए हुए हैं। राजनीतिक दल इनके संपर्क में रहते हैं।    
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डेरा ब्यास प्रमुख से मिलते नरेंद्र मोदी। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंजाब की राजनीति में धार्मिक डेरों का हमेशा से प्रभाव खासा रहा है। प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से ये चुनाव के नतीजों पर भी असर डालते रहे हैं। यही कारण है कि सभी राजनीतिक दल चुनाव आते ही डेरों के फेरे लगाना शुरू कर देते हैं। इस बार भी यह सिलसिला शुरू हो गया है। सभी राजनीतिक पार्टियां किसी न किसी रूप में इन डेरों के संपर्क में हैं। डेरों के पास अपना बड़ा वोट बैंक है। डेरों का रुझान राजनीतिक दलों की दशा-दिशा बदलने की क्षमता रखता है। कई चुनावों में यह साबित भी हो चुका है। 

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पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के एक शोध के अनुसार पंजाब की कुल जनसंख्या का 70 फीसदी हिस्सा किसी न किसी डेरे में आस्था रखता है। राज्य में एक हजार से अधिक बड़े-छोटे डेरे हैं। उनके अनुयायी व समर्थक विदेश तक फैले हुए हैं। अमृतसर से आम आदमी पार्टी  के लोकसभा उम्मीदवार कुलदीप सिंह धालीवाल हाल ही में ब्यास डेरे में पहुंचे थे। पिछले एक हफ्ते में यहां विधानसभा में विपक्ष के नेता व कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह बाजवा और पटियाला से भाजपा उम्मीदवार परनीत कौर मिलने जा चुकी हैं।

इन डेरों का राजनीतिक प्रभाव सबसे अधिक 
डेरा सच्चा सौदा मालवा क्षेत्र में असरदार है, तो राधा स्वामी डेरा ब्यास माझा में। सचखंड बल्लां दोआबा में खासा असर रखता है। वहीं ढक्की साहब और नामधारी संप्रदाय के डेरे का प्रभाव लुधियाना में है। तमाम डेरों की अपनी-अपनी राजनीतिक ज़मीन है। एक अनुमान के मुताबिक पंजाब में 9 हजार सिख और 12 हजार गैर सिख डेरे हैं। इनमें तकरीबन 300 डेरा प्रमुख हैं, जिनका पंजाब के साथ हरियाणा और हिमाचल में भी असर है। इनमें से भी 12 डेरे ऐसे हैं जिनके एक लाख से ज्यादा अनुयायी हैं।
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1. डेरा सच्चा सौदा: इसका मुख्यालय हरियाणा के जिला सिरसा में है, लेकिन अनुयायियों की ज्यादा तादाद पंजाब में है। बठिंडा जिले का सलाबातपुरा डेरा पंजाब में सच्चा सौदा का सबसे बड़ा डेरा है। गुरमीत राम रहीम इसके प्रमुख हैं। पंजाब में डेरे के कई नामचर्चा घर हैं। डेरे का मालवा की सीटों पर अच्छा प्रभाव है। इसका अपना राजनीतिक विंग भी है, जो यह तय करता है कि किस पार्टी का समर्थन करता है। कई बार विंग सार्वजनिक रूप से तो कई बार गुप्त रूप से समर्थन का निर्णय लेता है। डेरा सच्चा सौदा का 27 विधानसभा क्षेत्रों में असर है।

2. राधा स्वामी डेरा ब्यास: डेरा ब्यास की स्थापना 1891 में बाबा जैमल सिंह ने की थी। डेरा ब्यास की एक किताब के मुताबिक देश भर में उनकी 5 हजार शाखाएं हैं। 99 देशों में भी उनकी ब्रांच हैं। पंजाब में उनके 80 से 90 सत्संग घर हैं। इसके अलावा हरियाणा में भी ऐसे ही सत्संग घर बनाए गए हैं। अमृतसर, गुरदासपुर, जालंधर, पटियाला और होशियारपुर लोकसभा सीटों पर डेरे का ज्यादा प्रभाव माना जाता है। इसके अलावा हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में भी डेरे के अनुयायी हैं। बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों इसके प्रमुख हैं।

3. दिव्य ज्योति जागृति संस्थान: दिव्य जागृति संस्थान का मुख्यालय जालंधर के नूरमहल में है। इस डेरे का आठ विधानसभा क्षेत्रों में प्रभाव है। आशुतोष महाराज ने 1983 में नूरमहल में संस्थान की स्थापना की थी। संस्थान के अनुसार उनके देश-विदेश में तीन करोड़ अनुयायी हैं। इसकी 350 शाखाएं हैं, जो 15 देशों में फैली हुई हैं। 29 जनवरी, 2014 को आशुतोष महाराज समाधि में चले गए थे। उनके अनुयायी मानते हैं कि वे जीवित हैं और समाधि या गहरी ध्यान की अवस्था में हैं। 1 दिसंबर, 2014 से उनके शरीर को एक फ्रीजर में रखा गया है।

4. डेरा सचखंड बल्लां : डेरा सचखंड बल्लां की स्थापना 1900 के प्रारंभ में पीपल दास ने की थी। अभी संत निरंजन दास इसके प्रमुख हैं। मूल रूप से हरनाम दास नाम वाले पीपल दास पंजाब के बठिंडा जिले के गिल पट्टी गांव के रहने वाले थे।  पीपल दास और सरवन दास ने फिर गिल पट्टी छोड़ दी और अंततः जालंधर के पास बल्लां गांव पहुंचे। पीपल दास ने गांव के लोगों को आसपास की जमीन उन्हें दान करने के लिए राजी किया और डेरा स्थापित किया। डेरे का आठ विधानसभा सीटों पर प्रभाव है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कई बड़े नेता यहां नतमस्तक हो चुके हैं।

5. निरंकारी मिशन: संत निरंकारी मिशन की स्थापना 1929 में बूटा सिंह ने की थी। सतगुरु बाबा हरदेव सिंह की बेटी माता सुदीक्षा 17 जुलाई 2018 से मिशन की छठी आध्यात्मिक प्रमुख हैं। बाबा बूटा सिंह ने अपना पद शहंशाह बाबा अवतार सिंह को सौंप दिया था। विभाजन के बाद बाबा अवतार सिंह दिल्ली चले गए। 1962 में उनके बेटे गुरबचन सिंह उनके उत्तराधिकारी बने । 24 अप्रैल 1980 को बाबा गुरबचन सिंह की हत्या कर दी गई। निरंकारी मिशन का 4 विधानसभा हलकों में प्रभाव है।

6. नामधारी समुदाय: नामधारी, जिन्हें कूका के नाम से भी जाना जाता है, सिख समुदाय का अभिन्न अंग हैं। सतगुरु राम सिंह नामधारी का जन्म पंजाब में 3 फरवरी, 1816 को हुआ था। सतगुरु जी ने सिख खालसा के गौरव को बहाल करने और अंग्रेजों से आजादी हासिल करने का संकल्प लिया था। उन्होंने नारी उद्धार, अंतर्जातीय विवाह और सामूहिक विवाह के साथ-साथ गोरक्षा पर भी ध्यान दिया था। राम सिंह को नामधारी संप्रदाय की नींव रखने वाला भी माना जाता है। लुधियाना के भैणी साहिब में इस समुदाय का मुख्यालय है। कई बड़े राजनेता यहां नतमस्तक होने पहुंचते हैं।

यह डेरे भी रखते हैं सियासी प्रभाव
ढक्की साहिब, भूरीवाले, डेरा बेगोवाल, बाबा कश्मीरा सिंह डेरा, दमदमी टकसाल, डेरा नानकसर, संत अजीत सिंह हंसाली साहब, संत दया सिंह सुरसिंह वाले, संत सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, परमेश्वर द्वार गुरमत प्रचार सेवा मिशन और डेरा बाबा रूमी वाला (भुच्चो कलां) आदि। रूपनगर के शामपुरा क्षेत्र में मान सिंह जी पिहोवा वालों व नंगल के पास ही मदन भगवान का डेरे के अलावा बाबा प्यारा सिंह भनियारां वाले का डेरा है।

नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, अमित शाह कर चुके हैं डेरा ब्यास का दौरा
राधा स्वामी सत्संग ब्यास के मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी सहित कई केंद्रीय मंत्री, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा व पहली कतार के अन्य पदाधिकारी और भाजपा शासन वाले राज्यों के मुख्यमंत्री जा चुके हैं। डेरा प्रमुख गुरिंदर सिंह ढिल्लों आरएसएस मुख्यालय नागपुर विशेष तौर पर जा चुके हैं। दिल्ली जाकर वह प्रधानमंत्री और अन्य केंद्रीय मंत्रियों से अक्सर मिलते रहते हैं। नए संसद भवन के शुभारंभ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर बाबा गुरिंदर सिंह ढिल्लों भी दिल्ली पहुंचे थे।

श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान पहुंचे थे राजनाथ
दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान नूरमहल आश्रम में पिछले वर्ष जुलाई में 'देव दुर्लभ श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव' का विशाल एवं भव्य आयोजन किया गया। इसमें लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने भाव, उमंग और जोश के साथ समागम में नतमस्तक हुए। इस दौरान खासतौर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह डेरा दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान पहुंचे थे। उनके अलावा भाजपा नेता  विजय सांपला, मनिंदरजीत सिंह बिट्टा, रणदीप सिंह सुरजेवाला कैबिनेट मंत्री ब्रह्म शंकर जिंपा, डॉ. बलजीत कौर, सांसद मनीष तिवारी, सांसद सुशील रिंकू, सांसद परनीत कौर, सांसद गुरजीत सिंह औजला, रवनीत सिंह बिट्टू, हिमाचल से सांसद प्रोफेसर (डॉ.) सिकंदर कुमार समेत आरएसएस के कई पदाधिकारी भी पहुंचे थे।

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