फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब: मुक्तसर पहुंचे डिप्टी सीएम रंधावा और मंत्री वड़िंग को करना पड़ा कर्मचारियों के विरोध का सामना

Fri, 26 Nov 2021 03:15 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, मुक्तसर (पंजाब)

सार

डिप्टी सीएम और परिवहन मंत्री के विरोध के दौरान पुलिस प्रशासन व मुलाजिमों के बीच काफी धक्का-मुक्की भी होती रही। मुलाजिमों को काबू करने के लिए पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। 
विज्ञापन
मुलाजिम से बात करते डिप्टी सीएम रंधावा व परिवहन मंत्री वड़िंग। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा शुक्रवार को मुक्तसर में थे। इस दौरान उन्हें तथा परिवहन मंत्री अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को विभिन्न मुलाजिम जत्थेबंदियों के विरोध का सामना करना पड़ा। रंधावा मिनी सचिवालय में जिला शिकायत निवारण कमेटी की बैठक में शामिल होने मुक्तसर आए थे। उन्हें यहां पहुंचते ही विभिन्न ठेका आधारित कच्चे मुलाजिमों के सख्त विरोध का सामना करना पड़ा। 

विज्ञापन


सचिवालय के पास पहुंचते ही ठेका आधारित संघर्ष मोर्चा के नेतृत्व में पावरकॉम, जल सप्लाई एवं सैनिटेशन विभाग, एनएचएम कर्मचारियों व आंगनबाड़ी मुलाजिमों समेत विभिन्न जत्थेबंदियों के प्रतिनिधियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस पर मुलाजिमों से बात करने के लिए उपमुख्यमंत्री रंधावा व राजा वड़िंग भी गाड़ी से उतरकर उनके पास पहुंचे तो मुलाजिम भड़क उठे और घेराव कर दिया। वे मांगों को लेकर ऊंचे स्वर में दोनों के साथ बात करने लगे। यहां तक कि उन्हें बोलने तक का मौका नहीं दे रहे थे। इस पर उपमुख्यमंत्री व परिवहन मंत्री के भी बोल बिगड़ गए। 

रंधावा ने ऊंची आवाज में बात करने पर एक मुलाजिम को स्पष्ट रूप से कह दिया कि तू कर ले जो करना। मैनूं डराएंगा ...। मतलब कि जो करना है कर लो, मुझे डराओगे क्या। वहीं राजा वड़िंग मुलाजिम पर बरसते हुए बोले कि तू डिप्टी सीएम नूं गल्ल नहीं करन दवेंगा, तू ही करेंगा। की करेंगा फिर...। इस पर भड़के रंधावा बोले- कर ले जो करना फिर...। साथ ही डिप्टी कमिश्नर को यह भी निर्देश दे दिए कि जो मुलाजिम ड्यूटी छोड़कर विरोध कर रहे हैं उन्हें सस्पेंड किया जाए। इस पर मुलाजिम और भड़क गए और काली झंडियां दिखाते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। रंधावा गाड़ी में बैठकर आगे बढ़ने लगे तो मुलाजिम गाड़ी के आगे जाकर भी विरोध की कोशिश करने लगे। बाद में रंधावा के गाड़ी में बैठने के बाद परिवहन मंत्री राजा वड़िंग ने प्रदर्शनकारियों का रोष शांत करने का प्रयास किया। मगर वे पंजाब सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते रहे। 
विज्ञापन


उधर, आंगनबाड़ी मुलाजिमों को भी आश्वासन देते हुए राजा वड़िंग ने काफी समझाने का प्रयास किया, मगर वे भी वड़िंग के समक्ष पंजाब सरकार व मुख्यमंत्री चन्नी के खिलाफ नारेबाजी करती रहीं। इस दौरान उन्हें देखते राजा वड़िंग मंद-मंद मुस्कुराते ही रहे। इस घटनाक्रम के दौरान पुलिस प्रशासन व मुलाजिमों के बीच काफी धक्का-मुक्की भी होती रही। मुलाजिमों को काबू करने के लिए पुलिस प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। 
 
मीटिंग हॉल के बाहर भी गरजे एनएचएम कर्मी
विरोध प्रदर्शन के बाद उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा द्वारा मिनी सचिवालय में मीटिंग हॉल में आयोजित बैठक के दौरान एनएचएम, आंगनबाड़ी मुलाजिमों, पावरकॉम व जल सैनिटेशन विभाग के मुलाजिमों के कुछ सदस्यों को वार्ता के लिए बुलाया गया। मगर इस दौरान मीटिंग हॉल में भी कोई सुनवाई न होने पर बाहर आकर एनएचएम कर्मियों ने सरकार खिलाफ जहां प्रदर्शन किया। वहीं सूत्रों के अनुसार पावरकॉम व जल एवं सैनिटेशन मुलाजिमों ने भी मिनी सचिवालय के अंदर नीचे हॉल में प्रदर्शन किया। जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार द्वारा 29 नवंबर को कैबिनेट मीटिंग में सभी विभागों के मसलों संबंधी अहम फैसला लेने का आश्वासन दिया गया है।

विज्ञापन

कैप्टन ने साढ़े चार वर्ष काम किया होता तो लोग शोर न मचाते: रंधावा 

उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अगर साढ़े चार वर्ष लोगों के काम किए होते तो लोग सड़कों पर शोर मचाने के बजाय उनके स्वागत में हार लेकर खड़े नजर आते। कैप्टन का अब पंजाब में कोई वजूद नहीं है। वे सूखे पत्तों की तरह झड़ चुके हैं। मिनी सचिवालय में प्रेसवार्ता के दौरान रंधावा ने विभिन्न जत्थेबंदियों द्वारा विरोध किए जाने पर कहा कि संघर्ष करना सभी का हक है। जत्थेबंदियों का विरोध करने का तरीका बिल्कुल गलत था। प्रदर्शनकारियों का ये कहना कि आपकी सरकार के पंद्रह दिन रह गए हैं, बहुत निंदनीय है। धरना प्रदर्शन भी उस समय करना चाहिए जब वे अपनी सरकारी ड्यूटी से छुट्टी लेकर आए हों। उन्होंने कहा कि वे तो गाड़ी से उतरकर प्रदर्शनकारियों के बीच मांगें सुनने गए, मगर उल्टा उन पर गलत शब्दावली का प्रयोग करते हुए ये कहना कि आपके पंद्रह दिन रह गए हैं, कहां तक सही है। ऐसी बातें करना सरकारी मुलाजिमों को शोभा नहीं देता क्योंकि वे तो जन प्रतिनिधि हैं। वे हैरान हैं कि अब तक जहां गए हैं, कभी इस तरह की अनुसाशनहीनता नहीं देखी। उन्हें संदेह है कि या तो ये शिअद या आप के वर्कर थे जो शिअद के इशारे पर जान-बूझकर आए थे। वे पता करेंगे कि ये लोग वाकई मुलाजिम थे या शिअद या आप वर्कर। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें