उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कैप्टन अमरिंदर सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अगर साढ़े चार वर्ष लोगों के काम किए होते तो लोग सड़कों पर शोर मचाने के बजाय उनके स्वागत में हार लेकर खड़े नजर आते। कैप्टन का अब पंजाब में कोई वजूद नहीं है। वे सूखे पत्तों की तरह झड़ चुके हैं। मिनी सचिवालय में प्रेसवार्ता के दौरान रंधावा ने विभिन्न जत्थेबंदियों द्वारा विरोध किए जाने पर कहा कि संघर्ष करना सभी का हक है। जत्थेबंदियों का विरोध करने का तरीका बिल्कुल गलत था। प्रदर्शनकारियों का ये कहना कि आपकी सरकार के पंद्रह दिन रह गए हैं, बहुत निंदनीय है। धरना प्रदर्शन भी उस समय करना चाहिए जब वे अपनी सरकारी ड्यूटी से छुट्टी लेकर आए हों। उन्होंने कहा कि वे तो गाड़ी से उतरकर प्रदर्शनकारियों के बीच मांगें सुनने गए, मगर उल्टा उन पर गलत शब्दावली का प्रयोग करते हुए ये कहना कि आपके पंद्रह दिन रह गए हैं, कहां तक सही है। ऐसी बातें करना सरकारी मुलाजिमों को शोभा नहीं देता क्योंकि वे तो जन प्रतिनिधि हैं। वे हैरान हैं कि अब तक जहां गए हैं, कभी इस तरह की अनुसाशनहीनता नहीं देखी। उन्हें संदेह है कि या तो ये शिअद या आप के वर्कर थे जो शिअद के इशारे पर जान-बूझकर आए थे। वे पता करेंगे कि ये लोग वाकई मुलाजिम थे या शिअद या आप वर्कर।