हरियाणा सरकार ने सभी विभागों से एक फार्मेट में जानकारी मांगी है। इसमें संवेदनशील पद, तीन साल से अधिक समय से एक सीट पर बैठे अधिकारियों की संख्या, एसओपी के आधार पर बदले अधिकारियों की संख्या, संवेदनशील सीटों पर से तबादले नहीं होने का कारण बताना है।
इन विभागों ने ही दी सूचना
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, महिला एवं बाल विकास, श्रम विभाग, पर्यावरण, वन विभाग, बागवानी, उड्डयन, रोजगार, जेल, पुरातत्व, स्माल, सेविंग एंड लाटरिज, सैनिक व अर्थ सैनिक कल्याण, भू रिकार्ड पीडब्ल्यूडी, तकनीकी शिक्षा, गृह रक्षी।
- डिविजनल आयुक्त : करनाल डिविजन, हिसार डिविजन।
- जिला उपायुक्त : हिसार, सिरसा, जींद, फतेहाबाद, फरीदाबाद, यमुनानगर।
- बोर्ड और निगम : हरेडा, खादी एवं ग्राम उद्योग, सरस्वती हैरिटेज विकास बोर्ड।
जिनमें सबसे अधिक भ्रष्टाचार वो विभाग नहीं दे रहे जानकारी
संवेदनशील पदों की जानकारी नहीं देने वाले विभागों, निगमों और बोर्डों में अधिकतर वो हैं, जिनमें भ्रष्टाचार सबसे अधिक हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो के रिकार्ड की बात करें तो पिछले साल सबसे अधिक भ्रष्टाचार के मामले पुलिस के 46, राजस्व विभाग के 33, बिजली निगमों के 24, शहरी स्थानीय निकायों के 14, खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों और परिवहन के 5-5, शिक्षा विभाग के 4, आबकारी व कराधान, सहकारिता के 3-3 मामले पकड़े हैं। उपरोक्त विभागों में से किसी ने भी अपना डाटा उपलब्ध नहीं कराया है।