पेट्रोल-डीजल की महंगाई के चलते चंडीगढ़ के लोग अब इलेक्ट्रिक वाहनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यही वजह है कि चंडीगढ़ में हिमाचल, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों से ज्यादा ई-वाहन चल रहे हैं। प्रशासन भी चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं ताकि शहर में प्रदूषण का स्तर कम हो। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति भी बनाई जा रही है।
यूटी प्रशासन जल्द इलेक्ट्रिक वाहन नीति लाने जा रहा है। इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा, डीसी विनय प्रताप और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देबेंद्र दलाई सदस्य हैं। कमेटी का मुख्य कार्य ईवी खरीदने पर पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स, पार्किंग फीस में रियायत, इंसेंटिव देने आदि पर फैसला लेना है। यह कमेटी नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिस पर लोगों के सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। यूटी प्रशासक से मंजूरी के बाद इलेक्ट्रिक वाहन नीति को पांच साल के लिए लागू किया जाएगा और उसके बाद बदली हुई शर्तों के अनुसार संशोधित किया जाएगा।
केंद्र सरकार की फेम और पीएलआई जैसी योजनाओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए एक इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। विभिन्न राज्यों ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां शुरू की हैं, जिनमें दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए सब्सिडी शामिल है। दिल्ली सरकार ईवी नीति लागू कर चुकी है, जबकि चंडीगढ़ समेत हरियाणा, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश मेघालय, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य अपनी ईवी नीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और जल्द ही इसकी घोषणा कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कुछ महीने पहले लोगों की मदद के लिए ई-अमृत वेबसाइट भी लांच की है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी सभी जानकारियां जैसे उनकी खरीद, निवेश के अवसरों, नीतियों और सब्सिडी के लिए जानकारी मिलेगी।