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चंडीगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ी चाह: पंजीकरण में हिमाचल व जम्मू-कश्मीर से आगे निकला सिटी ब्यूटीफुल

Sat, 22 Jan 2022 05:45 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

21 जनवरी 2022 तक पूरे देश में 9 लाख 57 हजार 491 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए हैं। वहीं चंडीगढ़ में 1916 ई-वाहन हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बाद लोगों का मन बदलने लगा है। 
 
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चंडीगढ़ में बढ़ रहा इलेक्ट्रिकल वाहनों का क्रेज। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पेट्रोल-डीजल की महंगाई के चलते चंडीगढ़ के लोग अब इलेक्ट्रिक वाहनों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। यही वजह है कि चंडीगढ़ में हिमाचल, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों से ज्यादा ई-वाहन चल रहे हैं। प्रशासन भी चाहता है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इलेक्ट्रिक वाहन अपनाएं ताकि शहर में प्रदूषण का स्तर कम हो। इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) नीति भी बनाई जा रही है।

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केंद्र सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, 21 जनवरी 2022 तक देशभर की सड़कों पर 9 लाख 57 हजार 491 इलेक्ट्रिक वाहन दौड़ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा 2 लाख 73 हजार 232 वाहन यूपी में जबकि 1916 ई-वाहन चंडीगढ़ में पंजीकृत हैं। देश भर के आंकड़ों पर गौर करें तो चंडीगढ़ 19वें नंबर पर है और जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के कई राज्यों से ई-वाहन पंजीकरण के मामले में आगे है। 

हरियाणा पूरे देश में 26 हजार 440 वाहनों के साथ 10वें नंबर पर और पंजाब 9305 वाहनों के 17वें नंबर पर है। चंडीगढ़ में इस वर्ष जनवरी के 21 दिनों में ही 58 इलेक्ट्रिक गाड़ियों का पंजीकरण आरएलए में हुआ है। वहीं, वर्ष 2021 में 731 ई-वाहनों का पंजीकरण हुआ है। प्रशासन के अधिकारियों को उम्मीद है कि ईवी नीति के लागू होने के बाद ज्यादा संख्या में लोग ई-वाहनों की तरफ रुख करेंगे। केंद्र सरकार ने भी इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की रियायत दी हैं। 

गाड़ी की खरीद के साथ पार्किंग में भी मिल सकती है छूट

यूटी प्रशासन जल्द इलेक्ट्रिक वाहन नीति लाने जा रहा है। इसके लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसमें नगर निगम आयुक्त आनिंदिता मित्रा, डीसी विनय प्रताप और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी (क्रेस्ट) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देबेंद्र दलाई सदस्य हैं। कमेटी का मुख्य कार्य ईवी खरीदने पर पंजीकरण शुल्क, रोड टैक्स, पार्किंग फीस में रियायत, इंसेंटिव देने आदि पर फैसला लेना है। यह कमेटी नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिस पर लोगों के सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे। यूटी प्रशासक से मंजूरी के बाद इलेक्ट्रिक वाहन नीति को पांच साल के लिए लागू किया जाएगा और उसके बाद बदली हुई शर्तों के अनुसार संशोधित किया जाएगा।

केंद्र की योजनाओं से ई-वाहनों की तरफ बढ़ा रुझान 

केंद्र सरकार की फेम और पीएलआई जैसी योजनाओं ने इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए एक इकोसिस्टम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। विभिन्न राज्यों ने अपनी इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां शुरू की हैं, जिनमें दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए सब्सिडी शामिल है। दिल्ली सरकार ईवी नीति लागू कर चुकी है, जबकि चंडीगढ़ समेत हरियाणा, आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, गोवा, गुजरात, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश मेघालय, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य अपनी ईवी नीतियों को अंतिम रूप दे रहे हैं और जल्द ही इसकी घोषणा कर सकते हैं। केंद्र सरकार ने कुछ महीने पहले लोगों की मदद के लिए ई-अमृत वेबसाइट भी लांच की है, जहां इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी सभी जानकारियां जैसे उनकी खरीद, निवेश के अवसरों, नीतियों और सब्सिडी के लिए जानकारी मिलेगी।

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