चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय सीनेट चुनाव में जीते सदस्यों में से कुछ की अधिसूचना न होने से पूरे कैंपस में चर्चाएं हैं। इसके साथ ही सीनेट में लंबे समय तक दबदबा रखने वाले गोयल ग्रुप के प्रमुख सदस्यों के नाम भी इस सूची में नहीं आए। उनका कहना है कि सीनेट गठन में जानबूझकर देरी की जा रही है। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। कहा, कुछ लोग अड़ंगे लगा रहे हैं, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाएंगे। पीयू का संचालन सीनेट के जरिए ही होगा। देरी जरूर हो रही है, लेकिन जीत पीयू के हितधारकों की होगी।
इस बार सीनेट के चुनाव बमुश्किल हो पाए थे। इसके लिए छात्रों से लेकर पूर्व सीनेटरों ने लंबा धरना-प्रदर्शन किया। हाईकोर्ट प्रकरण पहुंचा, जहां से सीनेट चुनाव कराने के आदेश हुए और चुनाव चरणबद्ध तरीके से करवाए गए। चुनाव होने के बाद अधिसूचना एक साथ सदस्यों की होनी थी, लेकिन वह भी चरणबद्ध ही हो रही है। इस पर गोयल ग्रुप ने सवाल खड़े किए हैं। कहा है कि पीयू के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है, लेकिन ऐसा करके कुछ लोग अपना हित साध रहे हैं। पीयू के लोग पढ़े-लिखे हैं, वह सब समझ रहे हैं। मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। आखिर में बचे 14 सदस्यों का नोटिफिकेशन भी करना होगा। कारण भी बताने होंगे। वहीं, दूसरी ओर पीयू ने कहा है कि कुछ मामले कानूनी प्रक्रिया के अधीन हैं, वह पूरे होने के बाद बाकी सदस्यों की अधिसूचना भी हो जाएगी।