संयुक्त अकाली दल के शिरोमणि अकाली दल (शिअद) में विलय पर चर्चा के लिए शनिवार को बुलाई बैठक में सभी नेताओं ने इस संबंध में अंतिम फैसला लेने का अधिकार पार्टी के अध्यक्ष सुखदेव सिंह ढींडसा को सौंप दिया। यह भी तय किया गया कि विलय पर फैसला लेने से पहले पार्टी जिला स्तर पर भी अपने नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों की राय लेगी।
सुखदेव सिंह ढींडसा के आवास पर हुई बैठक में संयुक्त अकाली दल के सभी वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। सभी नेताओं ने सर्वसम्मति से अध्यक्ष सुखदेव ढींडसा को एक कमेटी गठित करने का अधिकार दिया, जो सियासी हालात का अध्ययन कर अध्यक्ष को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। इस रिपोर्ट पर सीनियर नेताओं के साथ चर्चा के बाद विलय के बारे में अंतिम फैसला लिया जाएगा। बैठक में कुछ नेताओं ने पार्टी के शिअद में विलय का खुलकर समर्थन किया, जबकि कुछ ने इस मुद्दे पर पार्टी को होने वाले नफे-नुकसान पर गौर करने के बाद फैसला लेने की बात कही।
पत्रकारों से बातचीत में पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा ने बताया कि पार्टी अध्यक्ष के अधीन गठित की जाने वाली कमेटी दो हफ्ते में अपनी रिपोर्ट सौंप देगी। इस बैठक में सभी नेताओं ने पार्टी के शिअद में विलय को लेकर अपनी-अपनी राय दी है। कमेटी की रिपोर्ट पर विचार के बाद जो भी फैसला होगा, वह सबको मंजूर होगा। कमेटी समयबद्ध तरीके से सभी पक्षों के विचार जानने के बाद दो हफ्ते में रिपोर्ट अध्यक्ष को सौंप देगी।
बंदी सिंहों की रिहाई के लिए रास्ता तलाशे केंद्र
परमिंदर ढींडसा ने बंदी सिंहों की रिहाई के बारे में गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर कहा कि कई मामले ऐसे होते हैं, जिनसे लोग भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं और ऐसे मामलों का प्रभाव दूरगामी होता है। बंदी सिंह सिखों का नेतृत्व करते हैं, उनके लिए केंद्र सरकार को नियमों से अलग हटकर सोचना चाहिए, उन्हें कोई न कोई राहत जरूर देनी चाहिए। हमारी पार्टी का मानना है कि बंदी सिंहों को रिहा करने के लिए सरकार को कोई रास्ता तलाशना चाहिए।