भाखड़ा नहर में कार गिरने से मनीमाजरा के दुकानदार अमरजीत सिंह के परिवार के तीन सदस्यों की मौत से मनीमाजरा में शोक की लहर है। वीरवार शाम को 5 बजे अमरजीत उनकी पत्नी और बेटी के शव को रोपड़ से लाकर संस्कार किया गया।
पूरा शहर उनके अंतिम संस्कार की रस्म पर पहुंचा। इस दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल, चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रधान प्रदीप छाबड़ा, पार्षद गुरचरण दास काला भी शमशान घाट पहुंचे। सभी परिवार के तीन लोगों की मौत पर सदमे में थे।
अमरजीत का छोटा भाई अशोक कुमार कांग्रेस नेता हैं। अमरजीत के शहर में लोगों से अच्छे संबंध थे। जिसके चलते शहर के लोग परिवार के तीन सदस्यों की मौत से सदमे में हैं। अशोक के परिजनों का श्मशान घाट में रो-रोकर बुरा हाल था। लोग बार-बार हादसे में बचे अमरजीत के बेटे अंकुश को पकड़कर सांत्वना दे रहे थे। एक साथ एक ही परिवार के तीन लोगों के संस्कार से हर ओर सन्नाटा पसरा था।
तीन किलोमीटर नहर के किनारे भाग कर लोगों ने बचाया अंकुश को
अंकुश किसी तरह गाड़ी का पिछला शीशा आधा खुला होने का फायदा उठाकर गाड़ी से बाहर तो आ गया। लेकिन नहर से बाहर निकलने की स्थिति में वह नहीं था। उसने नहर के पानी में ऊपर आकर आपने आप को बचाने के लिए हाथ पांव मारने शुरू किए तो दो राहगीरों ने उसे बचाने की कोशिश शुरू की।
अमरजीत और अशोक के मित्र रामेश्वर गिरि ने बताया राहगीरों ने अपनी पगड़ी उतारकर अंकुश तक फेंकी। लेकिन बात नहीं बनी। नहर का पानी अंकुश को खींचे ले जा रहा था। पानी अंकुश को तीन किलोमीटर तक खींचकर ले गया। लेकिन दो जान बचाने वाले मसीहों ने पीछा नहीं छोड़ा और तीन किलोमीटर तक नहर के किनारे अंकुश के पीछे पीछे-पीछे भागते रहे।
जब बात नहीं बनी तो उनमें से एक बाइक पर ख्वाजा पीर की दरगाह पर गया और बड़ी रस्सी लेकर आया। उस रस्सी के सहारे दोनों ने अंकुश को बाहर निकाला। इसी ख्वाजा पीर के दर पर अमरजीत अपने परिवार के साथ माथा टेकने गए थे। इसके बाद लौटते वक्त यह हादसा हुआ। अंकुश ने होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया है। उसका छोटा भाई अवि होटल मैनेजमेंट का डिप्लोमा कर रहा है। जबकि मरने वाली उसकी बहन अमनदीप कौर बीएससी नर्सिंग का कोर्स कर रही थी।