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दलित नेता AAP में शामिल, साथ में वो भी जुड़े जो उनके 'गुनाहगार'

Mon, 26 Dec 2016 04:14 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मानसा(पंजाब)
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दलित नेता बंत सिंह ने ज्वॉइन की आप
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विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब के प्रमुख दलित नेताओं में एक ने बंत सिंह झब्बर आम आदमी पार्टी (आप) में शामिल हो गए हैं। उनके साथ उन लोगों को भी पार्टी में जगह दी गई है, जिनपर बंत सिंह के हाथ पैर काटने और उनकी बेटी से दरिंदगी करने का आरोप हैं।
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अब हरबिंदर और नवदीप 7 साल की सजा पूरी कर चुके हैं। नवदीप जाट महासभा का पदाधिकारी भी है। हालांकि आप के पंजाब प्रभारी संजय सिंह ने मामले से अनभिज्ञता जताते हुए मामले की जांच करवाए जाने की बात कही।

लिबरेशन पार्टी छोड़कर आए बंत सिंह ने कहा कि ये बात अलग है कि मेरी बेटी की जिंदगी खराब करने वाले भी अब आम आदमी पार्टी में हैं, लेकिन मैं अपनी लड़ाई जारी रखूंगा। अब मेरी लड़ाई ने नई करवट ले ली है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा भी दिन आएगा।
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संजय सिंह की मौजूदगी में मिली सदस्यता

दलित नेता बंत सिंह ने ज्वॉइन की आप
रविवार को मानसा के गोशाला भवन में आप के पंजाब प्रभारी संजय सिंह की मौजूदगी में बंत सिंह आप में शामिल हुए। व्हीलचेयर पर आए बंत सिंह मंच पर नहीं चढ़ सके, इसलिए संजय ने स्टेज से उतरकर उन्हें पार्टी की सदस्यता दी।

स्टेज पर हरबिंदर सिंह और नवदीप सिंह को भी पार्टी की मेंबरशिप दी गई। ये दोनों वही लोग हैं, जिन पर 2000 में बंत सिंह की बेटी के साथ दरिंदगी करने का आरोप है। बंत सिंह ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया तो उनके दोनों हाथ और एक पैर काट दिए थे।

संजय सिंह के साथ मंच पर खड़े हरबिंदर सिंह ने बाद में बताया कि पार्टी को उन्हें लेकर कोई एतराज नहीं है। दूसरी ओर, संजय सिंह ने कहा कि उन्हें हरबिंदर और नवदीप के बारे में जानकारी नहीं थी। इसलिए इस मामले की जांच की जाएगी।
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‘द बैलड ऑफ बंत सिंह’ बुक ने किया मशहूर

दलित नेता बंत सिंह ने ज्वॉइन की आप
मजहबी सिख बंत सिंह की बेटी पर ऊंची जाति के लोगों ने जब जुल्म किया तो पंचायत, रिश्तेदारों व दोस्तों ने उन्हें चुप रहने की सलाह दी। लेकिन बंत ने लड़ाई का रास्ता चुना। हाथ-पांव गंवाने पड़े, पर डटे रहे।

कई जत्थेबंदियों ने देशभर में धरने शुरू किए। इसके बावजूद बंत की आवाज दबी रह गई। दोषियों को जेल पहुंचाने के बाद उनके स्ट्रगल पर निरुपमा दत्त ने एक किताब लिखी- 'द बैलड ऑफ बंत सिंह', जो 21 जनवरी 2015 को जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में रिलीज हुई।

फेस्टिवल में बंत सिंह ने कहा कि मुझे शारीरिक अपंगता का कोई गम नहीं। संघर्ष मेरा जीवन है और इसे संघर्ष से ही जिऊंगा। इसके बाद उन्हें दुनिया जानने लगी।
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