देश में भूजल स्तर की जानकारी के लिए विशेषज्ञों को तीन महीने तक इंतजार नहीं करना होगा। अब 24 घंटे में हर 6 घंटे के अंतराल पर उन्हें देश के हर क्षेत्र के मौजूदा भूजल स्तर की जानकारी मिलती रहेगी। यह होगा डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर से, जिसे देश के सभी क्षेत्रों में लगाया जाएगा। यह कार्य शुरू हो चुका है।
इस रिकॉर्डर की खास बात यह है कि इसकी मदद से भूजल स्तर की जानकारी के साथ ही भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा का भी पूर्वानुमान मिलेगा। पानी का मापन करने वाला यह उपकरण जमीन की निचली सतह में होने वाली हलचलों का भी अपडेट देगा, जिससे भूकंप जैसी आपदा से बचाव के लिए समय पर तैयारी की जा सकेगी। यह जानकारी केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के अध्यक्ष सुनील कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि आंध्र प्रदेश में इस पर तेजी से काम हो रहा है। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में इसके फायदे को देखते हुए इसकी जानकारी आपदा प्रबंधन ईकाई को दे दी गई है। इस उपकरण से लगभग एक महीने पहले क्षेत्र विशेष में भूकंप आने का संकेत मिलेगा, क्योंकि इसका सेंसर पानी की निचली सतह की हलचलों में होने वाले बदलाव को भी तेजी से ट्रेस कर सकता है। इस उपकरण में लगे साउंड मशीन केबल के साथ टेलीमीटर से जुड़े होते हैं, जो हर 6 घंटे पर सर्वर पर अपडेट देते हैं।
अब समय पर बन सकेगी राहत योजना
अब तक देश में भू जलस्तर मापने के लिए मानव संसाधन का प्रयोग किया जाता है, जिससे प्रक्रिया पूरी होने में तीन महीने का समय लग जाता है। सुनील कुमार ने बताया कि एक वर्ष में जनवरी, मई, अगस्त और नवंबर में बोर्ड को पानी का स्तर पता चलता है। इस रिपोर्ट के आधार पर काम करना मुश्किल होता है। क्योंकि सूखा आने की जानकारी बहुत कम समय पहले होने पर हम चाहकर भी बचाव कार्य नहीं कर पाते। अब इस मशीन से हर 6-6 घंटे पर सीधे सर्वर पर जानकारी पहुंचेगी। जिसके आधार पर कार्य योजना बनाना आसान होगा।
रिकॉर्डर ऐसे करेगा काम
डिजिटल वॉटर लेवल रिकॉर्डर प्रेशर सेंसर तकनीक पर आधारित है। सुनील कुमार ने बताया कि यह तकनीक भूजल स्तर के दबाव को उसकी गहराई में परिवर्तित करके आंकड़े देती है। मशीन में लगी चिप से वॉटर लेवल की ऑनलाइन जानकारी मिल जाती है। इससे मिले आंकड़ों के आधार पर क्षेत्र को क्रिटिकल, सेमी क्रिटिकल और सुरक्षित श्रेणी में बांटा जा सकेगा। इसकी रिपोर्टर के आधार पर सूखे से बचाव संबंधी योजनाएं बनाने में आसानी होगी।
देशभर में लगेंगे 35 हजार रिकॉर्डर
इस योजना के अन्तर्गत देशभर में 35 हजार डिजिटल वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए जाने हैं। इसमें से तीन हजार लगाए जा चुके हैं। इस उपकरण के जरिए देश के प्रत्येक कोने में पानी के स्तर को आसानी से मापा जा सकेगा। इसकी मदद से ज्यादा पानी वाले क्षेत्रों से कम पानी वाले क्षेत्रों में आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकेगी।