सीसीटीएनएस के नाम पर बनाई फर्जी वेबसाइट
लुधियाना के पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि आरोपी अमन पिछले काफी समय से संगरूर जेल में बंद है। वह जेल के अंदर से ही सोशल मीडिया से लोगों से जुड़ा। आरोपी ने सीसीटीएनएस नाम से एक फर्जी वेबसाइट बना रखी है। वेबसाइट में वह खुद को एडीजीपी (सेंट्रल कमांडेंट) नई दिल्ली बताता था। अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क और प्रणाली (CCTNS) राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) का एक विभाग है।
16 से 22 हजार रुपये तक वेतन का देता था झांसा
अमन फर्जी वेबसाइट के जरिये लोगों को सीसीटीएनएस में वालंटियर भर्ती होने का झांसा देता था और एक फार्म भरने के नाम पर 999 रुपये लेता था। उसने सैंकड़ों लोगों से फर्जीवाड़ा किया है और उन्हें निजी तौर पर सीसीटीएनएस में वालंटियर के तौर पर काम करने को कहा। वह नौजवानों को झांसा देता था कि वह काम पुलिस के इंटेलिजेंस विभाग का ही करेंगे लेकिन वह प्राइवेट तौर पर भर्ती रहेंगे। उन्हें 16 से 22 हजार रुपये गुप्त फंड से वेतन मिलेगा। वह हर नौजवान को एक पद भी देता था।
आरोपी बेहद ही शातिर है। अगर किसी व्यक्ति को अथॉरिटी लेटर या कोई कागजात भेजन होता था तो वह पंकज सूरी के माध्यम से भेजता था। पंकज बाद में प्रिंट निकालकर कागजात संबंधित व्यक्ति को भेज देता था। आरोपियों ने फर्जी स्टैंप भी बनवा रखी थी और अधिकारियों की पूरी जानकारी भी देता था। अमन काम पूरा होने के बाद पंकज को जेल के अंदर से ही निर्देश देता था ताकि किसी को उन पर शक न हो।
ऑनलाइन लेता था पैसा, जीमेल व फेसबुक अकाउंट भी बना रखा
आरोपी अमन जेल में बैठकर भी पूरी तरह से बाहरी दुनिया से जुड़ा था। वह ऑनलाइन भुगतान लेता था। उसने अपना एक क्यूआर कोर्ड भी बना रखा था ताकि अगर किसी को क्यूआर कोड के जरिये पैसे भेजने हैं तो सीधे उसके खाते में भेज सके। आरोपियों ने एक्सिस बैंक का एक खाता नंबर भी दे रखा था। आरोपी ने जेल के अंदर से ही सीसीटीएनएस के नाम से फेसबुक अकाउंट, जीमेल अकाउंट भी बना रखा था। इस पर सरकारी लोगो का भी इस्तेमाल किया गया था। आरोपी ने व्हाट्सएप पर भी एक फर्जी डीपी लगा रखी थी। इसमें खुद को एडीजीपी सेंट्रल कमांडेंट दिखाया है। वह अब तक 400 से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं।
पहले भी आरोपी पर आईपीएस और आईएएस अधिकारी बनने के हैं मामले दर्ज
पुलिस कमिश्नर मंदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि आरोपी पहले फर्जी आईपीएस और आईएएस अधिकारी बन चुका है। वह पुलिस और प्रशासन के काम करने के तरीके से पूरी तरह से वाकिफ है। वह आसानी से अधिकारियों की एक्टिंग करता था और दूसरे राज्यों में जाकर खुद को आईपीएस और आईएएस अधिकारी बताता था ताकि उसे उपयुक्त सुरक्षा और सुविधा मिल सके।
नाभा जेल ब्रेक कांड में भी था शामिल
पुलिस कमिश्नर ने कहा कि आरोपी अमन कुमार उर्फ अविलोक विराज खत्री पर पंजाब व अन्य राज्यों में फर्जीवाड़े के कई मामले दर्ज हैं। इसके अलावा वह पटियाला समेत पंजाब की कई जेलों में बंद रह चुका है। आरोपी का नाम नाभा जेल ब्रेक कांड में भी सामने आया था। इसने आरोपियों को वर्दी और कानूनी कागजात उपलब्ध करवाए थे। इन्हीं के सहारे गैंगस्टर नाभा जेल से भागे थे। नाभा जेल ब्रेक कांड के बाद आरोपी को वहां से संगरूर की जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। पुलिस आरोपियों से पूछताछ करने में जुटी है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपियों से कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।