एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजबीर सिंह के हत्यारे विजय भारद्वाज को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई और दस हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। एसीपी राजबीर सिंह की हत्या के मामले में आठ साल बाद यह फैसला सुनाया गया।
एसीपी राजबीर सिंह की हत्या में सीबीआई अदालत ने डिफेंस के गवाहों के बयान दर्ज होने और बहस के बाद यह फैसला सुनाया। करीब 7 साल पहले 24 मार्च 2008 की शाम एसीपी राजबीर सिंह का मर्डर एमजी रोड पर प्रॉपर्टी डीलर 'विजय असोसिएट्स' के दफ्तर में कर दिया गया था।
प्रॉपर्टी डीलर विजय भारद्वाज तभी से जेल में बंद था। इस केस को सीबीआई में ट्रांसफर किए जाने के यह वर्ष 2011 तक अंबाला में सीबीआई कोर्ट में चला। अंबाला में सीबीआई कोर्ट खत्म होने के बाद से यह केस पंचकूला सीबीआई कोर्ट में चल रहा है। प्रोसिक्यूशन की ओर से इस मामले में कुल 104 गवाह थे।
इस मामले में दिल्ली पुलिस के दो पुलिसकर्मियों के भी बयान दर्ज किए गए थे। मर्डर की शाम क्राइम ब्रांच के तत्कालीन एसीपी राजबीर सिंह के साथ उनकी गाड़ी गुड़गांव ले जाने वाले ड्राइवर जवाहर और पीएसओ लीलू राम ने बयान भी दर्ज कराए गए थे।
इन दोनों ने वारदात की शाम के घटनाक्रम के बारे में सारी जानकारी दी थी। मर्डर के दौरान यह दोनों विजय भारद्वाज के ऑफिस के नजदीक पेट्रोल पंप पर क्राइम ब्रांच की उसी गाड़ी में बैठे थे। यहां उन्हें एसीपी ने इंतजार करने के लिए कहा था।
रुपये की लेनदेन का था मामला
मर्डर का कोई चश्मदीद न होने की वजह से यह केस परिस्थितिजन्य सबूतों पर टिका हुआ था। एसीपी राजबीर सिंह की मोटी रकम विजय भारद्वाज के पास थी। वह रकम वापस नहीं कर पा रहा था। उनके मुताबिक, राजबीर सिंह ने उसे धमकी दी थी। विजय भारद्वाज ने पुलिस को बताया था कि उसने कहीं से रकम लेकर आने के बहाने अपनी सुरक्षा का हवाला देकर एसीपी से प्वाइंट 32 बोर की रिवाल्वर ले ली थी।
24 मार्च की शाम उसने धोखे से एसीपी के पीछे जाकर उनकी गर्दन में बैक साइड से गोली मारी थी। करनाल की फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट ने बताया है कि मर्डर इसी रिवॉल्वर से चली गोली से हुआ था। फॉरेंसिक एक्सपर्ट के बयान कोर्ट में कलमबंद किए गए थे। सीबीआई ने भी कोर्ट में मर्डर का यही मोटिव बताया कि विजय भारद्वाज की माली हालत खस्ता हो चुकी थी।
वह एसीपी के अलावा कई लोगों की रकम वापस नहीं कर पा रहा था। सीबीआई ने इस मामले में सावदा निवासी प्रॉपर्टी डीलर जसबीर सिंह, रानीखेड़ा निवासी डीलर पुरुषोत्तम, हरियाणा बिजली बोर्ड के कर्मचारी अनिल मलिक, गुड़गांव निवासी ट्रांसपोर्टर ओमप्रकाश वगैरह के बयान कोर्ट में दर्ज कराए थे। उन्होंने कोर्ट को बताया कि विजय की माली हालत बहुत खराब हो चुकी थी और वह कर्ज वापस नहीं कर पा रहा था। बाउंस हुए चेक भी कोर्ट में दिए गए।