लुटेरे वारदात को अंजाम देने के लिए पुलिस की वर्दी पहनकर आए थे। वारदात को अंजाम देने के बाद लुटेरे पुलिस वर्दी को वहीं फेंक गए। वारदात स्थल पर पहुंची पुलिस ने जब वर्दी को खंगाला तो उसमें यूपी और दिल्ली पुलिस का साइन लगा हुआ था। इससे पुलिस को शक हुआ आरोपी किसी दूसरे राज्य के हैं। इसके बाद दिल्ली पुलिस से मामले को साझा कर मदद ली गई।
पुलिस ऐसे पहुंची आरोपियों तक
पुलिस टीम को शक होने के बाद टीम ने वारदात स्थल वाली जगह के मोबाइल डाटा उठाया लेकिन सैकड़ों डाटा आने के बाद क्राइम ब्रांच के पास आरोपियों तक पहुंचना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। इस दौरान यूपी और दिल्ली के कई मोबाइल नंबर पुलिस के हाथ लगे। इससे टीम का शक और गहरा गया क्योंकि वर्दी भी यूपी और दिल्ली के मिले थे। इसके बाद पुलिस ने उन सभी नंबर को लोकेट करना शुरू कर दिया।
इसके अगले एक दिन बाद एक आरोपी के बारे में टीम को गुप्त सूचना मिली कि आरोपी दिल्ली में ठहरा हुआ है, जिसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने ट्रैप लगाकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के गिरफ्त में आते ही उसकी निशानदेही पर टीम गाजियाबाद के लोनी से बाकी के आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर केस सुलझा दिया। पुलिस ने आरोपियाें के पास लूटे हुए सोने और हीरे के गहने भी बरामद कर लिए।
पुलिस की हुई थी किरकरी
शोरूम में लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद से भी पुलिस लुटेरों की पहचान नहीं कर पाई और न ही तनिष्क शोरूम का सिक्योरिटी गार्ड आरोपियों की पहचान सके। इससे पकड़े गए आरोपियों पर अदालत में पुलिस इन पर लगाई गई डकैती और आर्म्स एक्ट की धारा साबित नहीं कर सकी। इनके पास से गहनों की रिकवरी के आधार पर अदालत ने इन सभी को तीन-तीन साल की सजा सुनाई थी।
1. भूरा कुरेशी, निवासी मुराद नगर, गाजियाबाद
2.मानव सोनी, निवासी वैशाली, गाजियाबाद
3. अजय सिंह, निवासी पिलखुवा, हापुड़
4.भूरा तोमर, निवासी पिलखुवा, हापुड़
5.नदीम, निवासी पिलखुवा, हापुड़
6.सुरेंद्र सिंह तोमर, निवासी पिलखुवा, हापुड़
7.सोनू राघव, निवासी पिलखुवा, हापुड़
8. हरजिंदर सिंह, निवासी पिलखुवा, हापुड़
9.अनुज कुमार, निवासी पिलखुवा, हापुड़