रोहतक रेपकांड में गिरफ्तार 8 आरोपियों में एक 'दरिंदा' ऐसा भी है, जिसने अपनी मां की आबरू पर हाथ डाला था। पुलिस की पूछताछ में रेपकांड के आरोपी राजेश उर्फ धूचडू ने खुद ये खुलासा भी किया है कि कुछ साल पहले उसके और उसकी मां के ममतामयी संबंधों में भी कड़वाहट आ गई थी।
ढाई साल पहले खुद उसकी मां ने सदर थाना में शिकायत दी थी कि राजेश ने उसके साथ भी अभद्रता की और मां-बेटे के रिश्ते को दागदार करने की कोशिश की। इससे साफ है कि दरिंदगी के आरोपियों ने किस कदर भूखे भेड़िए की तरह निर्भया को नोचा होगा। राजेश उर्फ घूचड़ू ने पूछताछ में एसआईटी को बताया कि करीब डेढ़ दशक पहले उसके पिता की मौत हो गई थी।
उस समय उसकी उम्र कम रही। जब बड़ा हुआ तो ममता का रिश्ता भी सामान्य नहीं रहा। ढाई साल पहले उसकी मां ने सदर थाने में उसी के खिलाफ शिकायत दे दी थी कि घूचडू ने उसके साथ अभद्रता कर मां-बेटे के रिश्ते को दागदार करने की कोशिश की।
हालांकि बाद में मामला निपट गया। बताया जा रहा है कि उसकी मां गांव छोड़कर और कहीं चली गई है। अब वह अकेला ही रह रहा था। अब इस रेपकांड में उसका नाम आ गया।
आठों आरोपी रिमांड पर, डीएनए टेस्ट होगा
नेपाली युवती के साथ दरिंदगी की हद तक हैवानियत करने वाले आठों आरोपियों का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। इससे पहले, गद्दी खेड़ी गांव से गिरफ्तार 8 युवकों को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने सभी को 8 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। वहीं दूसरी तरफ गिरफ्तार युवकों को सजा दिलाने के लिए सबूत जुटाना जांच टीम के लिए चुनौती बन गया है।
अब एसआईटी साइंटिफिक सबूत जुटाने पर ज्यादा जोर दे रही है। बता दें कि आरोपी दरिंदों ने खेत में बने कोठड़े में अपने गुनाह के सबूत मिटा दिए। सामूहिक दुराचार के 8 दिन तक आरोपी दरिंदगी के निशान मिटाने में लगे रहे। पुलिस दोबारा एफएसएल एक्सपर्ट की सहायता से मौके का मुआयना करेगी, ताकि खून के धब्बे से लेकर बाल जैसा बारिक से बारिक सबूत ढूंढा जा सके।
जिला बार एसोसिएशन ने आरोपियों की पैरवी करने से मना कर दिया। पेशी के दौरान कोर्ट में कोई भी वकील आरोपियों की तरफ से पेश नहीं हुआ। कोर्ट ने आरोपियों की पैरवी के लिए लीगल एड सर्विस से वकील मांगा है।
निर्भया की सांस बंद होने तक डटा रहा राजेश
शुरुआती पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि सामूहिक दुष्कर्म के बाद लड़की को शहर की तरफ रवाना कर दिया, लेकिन तभी ध्यान आया कि अगर लड़की ने किसी को बता दिया तो सब फंस जाएंगे। इसलिए मारपीट के बाद नेपाली युवती की गला दबाकर हत्या कर दी।
वहीं पर ड्रेन नंबर 8 के पास उसके शरीर में सीमेंट की शीट के टुकड़े व कंडोम का पैक तक डाल दिया। लड़की की सांस बंद होने तक राजेश उर्फ घूचड़ू वहां डटा रहा। पुलिस अब राजेश से अलग से पूछताछ करने की तैयारी कर रही है।
सोमबीर की मौत मामले में सर्च वारंट
जांच टीम ने कांड के 9वें आरोपी सोमबीर के बारे में अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस से पता चला कि सोमबीर ने अपनी बहन के घर आकर जहरीला पदार्थ खा लिया। उसे निजी अस्पताल में दाखिल कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। सोमबीर की मौत कैसे हुई, मामले में उसकी क्या भूमिका रही। इसकी जांच के लिए सर्च वारंट जारी किया जाए। अदालत ने जांच टीम की याचिका स्वीकार कर ली है।
सभी आरोपी गद्दी खेड़ी गांव के हैं
नेपाली मूल की युवती के साथ हैवानियत की सारी हदें पार करने वाले आरोपियों के बारे में जानकर आप चौंक जाएंगे। सभी आरोपी गद्दी खेड़ी गांव के हैं। राजेश उर्फ घुचड़ू पुत्र जगदीश बेरोजगार है और गांव में घूमता रहता है।
सुनील उर्फ शीले पुत्र रमेश अपनी दुकान शीले कोल्ड ड्रिंक पर काम करता था। सरवर उर्फ बिल्लू पुत्र ओमप्रकाश लकड़ी का काम करता है। एक आरोपी मनबीर पुत्र धर्मबीर है। सुनील उर्फ माड़ा पुत्र सूरजभान गांव में ही शराब के ठेके चलाता है।
बताया जा रहा है कि पवन पुत्र करमू किसी फैक्ट्री में काम करता है। प्रमोद उर्फ पदम गांव के पूर्व सरपंच रणबीर सिंह का बेटा है और खेती करता है। सोमबीर पुत्र शीलकराम एक निजी फैक्ट्री में काम करता है और नेपाली संतोष शीले की दुकान पर रहता था।
मलेशिया में रहते हैं नेपाली संतोष के पिता
नेपाली लड़के संतोष के पिता विक्रम मलेशिया में रहते हैं। अनिल का दावा है कि संतोष की यहां किसी से ज्यादा जान पहचान नहीं थी और एक नेपाली लड़का पदम कभी-कभी रोहतक से उसे मिलने आता था।
रविवार को उठाकर ले गई थी पुलिस नेपाली को
अनिल ने बताया कि पुलिस नेपाली को रविवार को भी दुकान से उठाकर ले गई थी लेकिन शाम को छोड़ भी गई। रविवार रात को अनिल ने नेपाली और सुनील दोनों को अपने सामने बैठाकर पूछा भी कि क्या उन्हें कुछ पता है या उन्होंने कुछ किया है तो नेपाली ने भगवान कसम खाकर कहा था कि उसे कुछ नहीं पता और कुछ नहीं किया। अपने भाई सुनील से क्यों पूछा, यह पूछने पर अनिल कहते हैं कि उन्हें भ्रम था कि नेपाली और सुनील दोनों साथ रहते हैं।
सोमवार को हुडा कांप्लेक्स से उठाया संतोष को
संतोष सोमवार को अपने जीजा के साथ हुडा कांप्लेक्स आया था। संतोष के जीजा को मलेशिया जाना था और वे यहां किसी से मिलने और सामान लेने आए थे। इसी दौरान पुलिस ने संतोष को उठा लिया।
नेपाली संतोष को चपरासी के परिवार ने काम दिया
निर्भया कांड के तीन आरोपी सरकारी स्कूल के चपरासी रमेश कुमार के परिवार से हैं। इस परिवार ने नेपाली संतोष को काम दिया। उसका बेटा अनिल कहता है कि संतोष हमारा बच्चा है। डेढ़ साल पहले वह मासूम लड़का नंबरदार के ढाबे में काम कर रहा था। मैं उसे अपनी दुकान में ले आया। घर पर रखा। दूध-घी खिलाया। अब वह जवान और तगड़ा हो गया है। लेकिन यह लड़का दरिंदगी की इस हद को पार कर जाएगा, इस बात पर अभी भी यकीन नहीं हैं।
मेरा छोटा भाई सुनील (22) भी संतोष की तरह ही बेकसूर है, लेकिन हम यह भी नहीं कह सकते कि पुलिस ने उन्हें जानबूझकर फंसाया है। हां, मेरा चचेरा भाई राजेश जरूर आवारा था, हम ही उसे रोटी खिलाते थे, लेकिन अब उसके साथ हमारा हंसता-खेलता परिवार भी उजड़ गया। अनिल बस इतना ही कह पाया कि उसकी आंखें भर आईं।
आंसु और भावनाओं को काबू कर अनिल कहता है कि मेरे पापा रमेश सरकारी स्कूल में चपरासी हैं। उन्होंने हमें शिक्षकों जैसे संस्कार दिए। लेकिन इस रूह कंपा देने वाले अपराध में पकड़े गए तीनों आरोपी मेरे घर से हैं। फिर भी हम नहीं मान सकते कि उन्होंने ऐसा जघन्य अपराध किया होगा।
सुनील और राजेश भी चपरासी के ही बेटे
शहर के निकटवर्ती गांव गद्दी खेड़ी गांव की संकरी गलियों में रहने वाले चपरासी रमेश कुमार का मकान है। रमेश कुमार शहर के शास्त्री नगर के सरकारी स्कूल में चपरासी हैं। आरक्षित वर्ग के परिवार में कई लोग सरकारी नौकरी में हैं, लेकिन रमेश के दोनों बेटों ने ग्रेजुएशन में ही पढ़ाई छोड़ दी। रमेश के बड़े बेटे अनिल ने गांव के बस अड्डे पर चाय और कोल्ड ड्रिंक की दुकान कर ली।
छोटा बेटा सुनील उर्फ शीला भी दुकान पर ही लग गया। काम बढ़ा तो अनिल पड़ोस के ही एक ढाबे से नेपाली लड़के संतोष को दुकान पर ले आया और उसे अपने घर ही रखने लगा। संतोष दुकान और घर दोनों में रच बस गया और परिवार का एक हिस्सा बन गया। संतोष ज्यादा समय सुनील के साथ ही रहता था।
रोहतक की निर्भया कांड का एक और आरोपी इसी परिवार का हिस्सा है। राजेश उर्फ घूचड़ू अनिल का चचेरा भाई है। उसकी मां कई साल पहले गांव छोड़कर पंजाब चली गई और अभी मकान भी बेच दिया था। वह राजेश को अपने पास बुलाना चाहती थी, लेकिन राजेश मकान के पैसे अपनी मां से वापस लेना चाहता था। मकान बिकने के बाद राजेश भी रमेश के घर पर ही रोटी खाता था।
3 आरोपियों के सिर पर नहीं पिता का हाथ
निर्भया कांड के तीन आरोपी पदम, राजेश और सोमबीर के सिर पर पिता का हाथ नहीं है। पूरा गांव दंग है कि उनके गांव के बच्चों ने ऐसा जघन्य अपराध कैसे कर दिया, जिससे रूह कांप जाए।
विधवा मां कर रही दोनों बेटों के लौटने का इंतजार
सोमबीर पुत्र सिलकराम ने दिल्ली में जहर निगल लिया, लेकिन घर पर उसकी मां को नहीं पता कि उसके बेटे का नाम सामने आ गया है। सिलकराम की विधवा कहती है कि मेरे दूसरे बेटे को भी पुलिस ने उठा रखा है। इस उम्मीद में घर के दरवाजे पर बैठी है कि जल्द ही दोनों बेटे वापस आएंगे।