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कुख्यात भूरा का क्राइम रिकॉर्ड काफी चौंकाने वाला

Sun, 05 Apr 2015 07:52 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पटियाला में गिरफ्तार कुख्यात गैंगस्टर अमित भूरा, असली नाम अमित मलिक दिल्ली, उत्तराखंड और यूपी पुलिस का टारगेट नंबर-1 रहा है। देहरादून पुलिस की कस्टडी से 15 दिसंबर 2014 से फरार गैंगस्टर अमित मलिक उर्फ भूरा ने तीन राज्यों की पुलिस को नाकों चने चबवा दिए।
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यूपी सरकार और उत्तराखंड सरकार ने उसपर पांच-पांच लाख रुपए यानि कुल 10 लाख का इनाम घोषित कर रखा था। वह ब्रैंडेड कपड़े पहनने और गर्लफ्रेंड रखने का शौकीन है। उसकी कई गर्लफ्रेंड थीं और वह अकेला ही कारें लूट लिया करता था। भूरा कई हत्याकांडों, बैंक रॉबरी, टोल रॉबरी, ट्रक लूट और पुलिस की कस्टडी से दो बार फरारी का मुलजिम है।

इसलिए पड़ा 'भूरा' नाम
अमित मलिक (30) मूल रूप से वेस्टर्न यूपी के मुजफ्फरनगर के फुगाना थाना इलाके के सरनावली गांव निवासी यशपाल मलिक का पुत्र है। गोरा रंग होने की वजह से अपराध जगत और पुलिस में उसका नाम 'भूरा' पड़ गया।
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राजपाल नाई के गिरोह से शुरुआत
मधु विहार थाने में 2010 में हुई गिरफ्तारी के बाद तैयार उसके डोजियर के मुताबिक, उसके आपराधिक जीवन की शुरुआत राजपाल नाई के गिरोह से हुई थी। उसने मुजफ्फरनगर में उसके खिलाफ गवाह केमिस्ट का मर्डर किया।

2002 में पुलिस एनकाउंटर में राजपाल की मौत के बाद वह मुजफ्फरनगर के कुख्यात भाइयों नीटू कैल और बिट्टू कैल के गिरोह में शामिल हुआ। पुष्पेंद्र, अनिल भारसी और राजीव भूरा समेत इस गिरोह ने कुख्यात धर्मेंद्र किरठल के गांव किरठल में उसके पिता समेत पांच लोगों को मार डाला था। 2005-06 में यूपी में तत्कालीन एसएसपी नवनीत सिकेरा की टीम ने इन सभी का सफाया कर दिया था, लेकिन भूरा बच गया।

गिरोह बनाकर दिल्ली-एनसीआर में सेटल

अब भूरा ने अपना गिरोह बनाया और दिल्ली-एनसीआर में सेटल हो गया। ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के तत्कालीन डीसीपी केशव द्विवेदी के मुताबिक, उन दिनों वह कौशाम्बी के अरावली टावर में आठवें फ्लोर पर एक फ्लैट में ठहरा हुआ था। उसने कौशाम्बी में करोला और इनोवा गाड़ी लूटी। दिल्ली में उसके खिलाफ मधु विहार, क्राइम ब्रांच व स्पेशल सेल के थानों, कल्याणपुरी और नंद नगरी थानों में केस दर्ज हैं।

2 दिसंबर 2009 की सुबह 7 बजे गाजीपुर में दिल्ली बॉर्डर पर एमसीडी टोल बूथ पर 19 लाख 35 हजार रुपये इनोवा सवार बदमाशों ने दो मिनट में लूट लिए थे। इनोवा की नंबर प्लेट पर पुलिस का निशान था। मधु विहार थाने में एफआईआर नंबर 111/09 दर्ज की गई थी। स्पेशल स्टाफ ईस्ट ने एक साल बाद अमित भूरा और उसके चार साथियों को गिरफ्तार किया था।

कल्याणपुरी थाने में 2009 में महिंद्रा लोगान कार लूट का केस उस पर दर्ज है। क्राइम ब्रांच में 2009 में आर्म्स एक्ट के तहत उस पर एफआईआर नंबर 105 दर्ज हुई थी। 2011 में स्पेशल सेल के एसीपी एस. के. गिरी ने उसे हथियारों समेत गिरफ्तार किया था।
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सीएम अखिलेश यादव ने भी संज्ञान में लिया था

दर्ज केस के अनुसार, वह उत्तराखंड पुलिस के जवानों को शराब पिलाकर उनकी कस्टडी से फरार हो गया था। उस पर मेरठ में बैंक लूट, फरीदाबाद में एलसीडी टीवी से भरा ट्रक लूटने और बरेली में शुगर मिल की 15 लाख की रकम लूट के केस भी दर्ज हैं।इस साल 5 अगस्त को रुड़की जेल से जमानत पर बाहर निकल रहे चीनू पंडित नामक मुलजिम पर फायरिंग की गई थी। चीनू तो वापस दौड़कर जेल में घुस गया था, लेकिन उसे रिसीव करने आए तीन लोग मारे गए थे। रुड़की पुलिस के मुताबिक, वह फायरिंग उत्तराखंड के कुख्यात सुनील राठी ने अमित भूरा से कराई थी।

भूरा उसी केस में उत्तराखंड पुलिस की कस्टडी में था। बताते चलें कि बीते 15 दिसंबर को बागपत में मुजफ्फरनगर का शातिर बदमाश अमित सिंह उर्फ भूरा पुलिस की अभिरक्षा से फरार हो गया था।

वह कोर्ट में पेशी के लिए आया था। बताया जाता है कि कोर्ट परिसर के पास स्कॉर्पियो में उसके साथी पहले से ही इंतजार कर रहे थे। उन्होंने मौके पर फायरिंग की थी। साथ ही पुलिस की दो एके-47 और एक एसएलआर राइफल भी लूट ले गए थे।
सीएम अखिलेश यादव ने भी मामले में संज्ञान में लिया था। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई थी।
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