ब्लड बैंक में डोनेट किए गए खून में केमिकल मिलाकर मौत का खेल खेला जा रहा था। केमिकल के सहारे आरोपी ब्लड की मात्रा दोगुनी कर उसे महंगे दाम पर बेचते थे। मामला पंजाब के जालंधर का है। यहां, गुलाब देवी अस्पताल में पिछले दो सालों से चल रहे ब्लड बैंक मामले में पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी के खिलाफ धोखाधड़ी की धारा 420 सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बीटीओ डॉ. हरजीत सिंह, टेक्निकल सुपरवाइजर भूपिंदर सिंह, टेक्नीशियन वेद प्रकाश पुत्र मंगा राम, टेक्नीशियन दिनेश कुमार और टेक्नीशियन बबलू के खिलाफ धारा 420, 465, 468, 471, 120बी के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
मामले की भनक लगते ही अस्पताल पहुंचे जोनल लाइसेंसिंग अथारिटी करुण सचदेवा, ड्रग इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह, अनुपमा कालिया, नवदीप सिंह और सहायक दिनेश कुमार की टीम ने जब ब्लड बैंक की सील खोलकर रिकार्ड चैक किया तो उसमें काफी खामियां मिलीं। वहीं मामले के बाद गुलाब देवी अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द हो सकता है।
यह था मामला
गुलाब देवी अस्पताल में खुले ब्लड बैंक में लोगों की तरफ से डोनेट किए गए खून के बैग को केमिकल मिला कर दोगुना कर मंहगे रेट में बेचा जाता था। ब्लड में कैमिकल मिक्स करके नेगेटिव ग्रुप का ब्लड ग्रुप तैयार कर पांच हजार रुपये तक बेचा जाता था। पिछले दिनों एक अस्पताल में जब रक्त वाहिनी ने ब्लड बैग भेजा तो रक्तदान करने वाली संस्था के नीरज बख्शी को शक हुआ।
उन्होंने गुलाब देवी अस्पताल के ब्लड बैंक में गड़बड़ी पाए जाने की शिकायत ड्रग लाइसेंसिंग अथारिटी के चेयरमैन को दी। इसके बाद शनिवार देर रात ड्रग विभाग की टीम ने रक्त वाहिनी ब्लड बैंक को सील कर दिया। नीरज बख्शी और अन्य संस्थाओं के नुमाइंदों ने कहा कि हाईकोर्ट में चल रही पीआईएल सीडब्लयूपी 15511/2015 में इस केस को अटैच करवाने के लिए वे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।