यही नहीं लापरवाह नगर निगम के खिलाफ लोगों को आक्रोश भी निरंतर बढ़ता रहा है। 2016 में लावारिस पशु की टक्कर से एक व्यक्ति घायल हो गया था, जो कोमा में चला गया। पीड़ित की पत्नी ने 30 लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग को लेकर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
जिम्मेदार है नगर निगम
नगर निगमों के पास पंजाब म्यूनिसिपल एक्ट 1976 के विभिन्न प्रावधानों के तहत शहर की सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशुओं को संभालने की जिम्मेदारी निगम की है लेकिन निगम अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल रहा। यही नहीं निगम लोगों से हर साल दो करोड़ रुपये काउ सेस वसूल करता है।
वकील एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने बताया कि अगर कोई भी व्यक्ति लावारिस पशु की टक्कर या उसके हमले से घायल होता है तो वह संबंधित निगम से मुआवजे की मांग कर सकता है। अगर हादसों में घायल लोग आगे आकर इस तरह की पहल करें तो सो रहे प्रशासन और निगम की आंख खुल सकती है।
इस कारण बढ़ी समस्या
जिला प्रशासन की अगुवाई में कोटकपूरा रोड स्थित गांव हररायपुर में चल रहे कैटल पौंड (गोशाला) में 4 नए शेड बनाए जाने का फैसला फरवरी 2018 में लिया गया था लेकिन इसमें प्रशासन व निगम के बीच तालमेल नहीं होने से काम धीमी गति से चल रहा है। लगभग 1 करोड़ 43 लाख 73 हजार रुपये की लागत से शुरू होने वाले काम के पूरा होने से शहर में करीब 500 जानवरों को रखा जाना था।
हररायपुर गोशाला में इस समय 6 शेड हैं जहां करीब 500 पशु रखे हैं। वहीं शहर की सड़कों पर 25 सौ पशु घूम रहे हैं। गोशाला के एक शेड में 150 पशुओं को रखने की क्षमता है। निगम करीब 15 शेड बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें 6 शेड पूरे हैं जबकि 4 शेड के लिए काम चल रहा है लेकिन बाकी रह रहे पांच अन्य शेड को बनाकर कब तैयार किया जाएगा इसे लेकर न तो जिला प्रशासन और न ही नगर निगम क्लीयर है।