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Punjab News: एआईजी मालविंदर सिंह का साथी पटियाला से गिरफ्तार, तीन महीनों से था फरार, पांच दिनों का मिला रिमांड

Wed, 24 Jan 2024 11:12 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

आरोपी बलवीर सिंह एआईजी सिद्धू के कहने पर विभिन्न विभागों में अनुसूचित जाति और स्वतंत्रता सेनानियों के कोटे के तहत भर्ती कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाता था। इसके बाद उनको ब्लैकमेल कर पैसों की मांग करता था। बाद में यह रकम बलवीर सिंह, मालविंदर सिंह और अन्य आरोपी आपस में बांट लेते थे।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने एआईजी मालविंदर सिंह सिद्धू के साथी बलवीर सिंह को पटियाला से गिरफ्तार किया है। बलबीर सिंह बीते करीब तीन माह से फरार था। उसके खिलाफ ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और जबरन वसूली की विभिन्न धाराओं में 30 अक्तूबर 2023 को विजिलेंस के एसएएस नगर थाने में केस दर्ज किया था। 

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पटियाला के गांव आलमपुर का रहने वाला बलवीर सिंह पंजाब मानवाधिकारी एआईजी मालविंदर सिंह सिद्धू का कारिंदा था। आरोपी उक्त पुलिस अधिकारी के कहने पर विभिन्न विभागों में कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज करने और उन्हें पैसे के लिए ब्लैकमेल करने के भ्रष्टाचार व आपराधिक मामले में वांछित था। विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता ने बताया कि अदालत से बलवीर सिंह का पांच दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया है।

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इस मामले में एआईजी सिद्धू उनके सहयोगी बलवीर सिंह और अन्य आरोपी शामिल हैं। गौरतलब है कि एआईजी सिद्धू पहले से ही न्यायिक हिरासत में है। जांच के दौरान पता चला है कि एआईजी सिद्धू ने खुद को गलत तरीके से आईजीपी, विजिलेंस ब्यूरो, पंजाब बताया जबकि वे 2017 के बाद कभी विजिलेंस ब्यूरो पंजाब में एआईजी या आईजी नहीं रहे। उक्त आरोपी बलवीर सिंह और अन्य ने मिलकर सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज करना शुरू कर दिया ताकि उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके और इन शिकायतों को वापस लेने के बदले में उनसे पैसे वसूले जा सकें।

एआईजी के कहने पर ब्लैकमेलिंग के लिए दर्ज कीं शिकायतें

जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि एआईजी सिद्धू ने सरकारी गाड़ी आर्टिगा (पीबी-65-ए डी-1905) का दुरुपयोग किया था और गाड़ी का तेल और अन्य खर्च सरकारी खाते से किया था। उन्होंने उक्त वाहन के उपयोग का कभी भी रिकॉर्ड (लॉग-बुक) नहीं रखा, जो सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग है।

आरोपी बलवीर सिंह ने एआईजी सिद्धू के कहने पर विभिन्न विभागों में अनुसूचित जाति और स्वतंत्रता सेनानियों के कोटे के तहत भर्ती कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें दर्ज कीं, ताकि उन पर दबाव डालकर ब्लैकमेल किया जा सके और बदले में रिश्वत ली जा सके। इसे बाद में रकम बलवीर सिंह, मालविंदर सिंह और अन्य आरोपी आपस में बांट लेते थे। 
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