कमिश्नर रेट पुलिस की अलग-अलग टीम इस मामले की जांच करने में जुटी थी। बताया जा रहा है कि पुलिस को सुखदेव सिंह और उसके तीन साथियों के बारे में सूचना मिली थी कि इन आरोपियों ने दोनों लूट की वारदातों को अंजाम दिया है। सूत्र यह भी बताते हैं कि पुलिस ने सुखदेव के तीन साथियों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था जबकि सुखदेव की तलाश जारी थी।
सीआईए-2 के प्रभारी बेअंत जुनेजा की टीम को सूचना मिली कि आरोपी सुखदेव सिंह मछीवाड़ा से मोटरसाइकिल पर सवार होकर कोहड़ा चौक की तरफ आ रहा है और उसे लुधियाना शहर की तरफ जाना है। सूचना मिलने के बाद टीम ने गांव पंजेता के पास ट्रैप लगाया। जब पुलिस ने आरोपी सुखदेव सिंह को घेरा और उसे आत्मसमर्पण को कहा। इस पर आरोपी ने पुलिस टीम पर ही ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
इंस्पेक्टर बेअंत जुनेजा और तीन अन्य पुलिसकर्मियों ने गाड़ी के पीछे छिपकर जान बचाई। इंस्पेक्टर बेअंत जुनेजा पीछे होते तब तक एक गोली उनके पेट के पास लग गई थी। गनीमत रही कि उन्होंने बुलेट प्रूफ जैकेट पहन रखी थी। इसके बाद पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। दोनों तरफ से करीब 15 से 20 गोलियां चलीं। पुलिस की एक गोली लगने से सुखदेव सिंह वहीं ढेर हो गया।
गोलियां चलने से इलाके में पहली दहशत और दोनों तरफ से वाहन भी रुके
सीआईए-2 की टीम ने सड़क पर ही आरोपी को घेर लिया था। सड़क के बीच पुलिस की गाड़ी देखकर दोनों तरफ का ट्रैफिक रुक गया। दोनों तरफ से गोलियां चलने पर लोगों में दहशत फैल गई। लोगों को लगा कि गैंगस्टर के दो गुट भिड़े हैं। हालांकि बाद में जानकारी मिली कि पुलिस से बदमाश की मुठभेड़ हुई है। इसके बाद घटनास्थल पर पुलिस की अन्य गाड़ियां पहुंचने लगीं। पुलिस के उच्च अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।