खुद को सीएम के पीए का दोस्त बताकर दो लोगों ने एनआरआई को आठ लाख की चपत लगा दी। दोनों ने एनआरआई से उसकी अमृतसर की कोठी से कब्जा हटवाने के लिए रुपये लिए थे।
ठगी के दो साल बाद एनआरआई की शिकायत पर पुलिस ने धोखाधड़ी के इस मामले में दोनों समेत तीन लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोपियों की पहचान करण सिंह, राजिंदर सिंह निवासी राजस्थान व भूपेश शर्मा निवासी बठिंडा के रूप में हुई है। आरोपियों की तलाश में पुलिस की एक टीम राजस्थान गई है।
एनआरआई महिंदर सिंह रंधावा का फेज-6 में एक मकान है। उनका पूरा परिवार बीस साल से कनाडा में रह रहा है। 2013 में उन्होंने घर की ऊपरी मंजिल बेचने की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने राजिंदर सिंह बाजवा से करार किया था, लेकिन बाद में बाजवा ने मकान नहीं खरीदा।
इसी बीच रंधावा कनाडा वापस चले गए। वहीं, मौका पाकर बाजवा ने मकान पर कब्जा कर लिया। साथ ही उक्त मंजिल को करण सिंह व राजिंदर सिंह को किराए पर देकर फरार हो गया।
न रुपये लौटाए और धमकाने लगे
रंधावा जब दोबारा इंडिया आए, तो किराएदारों ने कहा कि वे इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हैं। साथ ही उन्हें हर माह नौ हजार किराया दे दिया करेंगे। उन्होंने रंधावा को बताया कि सीएम का पीए भूपेश शर्मा उनका अच्छा दोस्त है। अगर किसी भी तरह का कोई काम है, तो वे करवा देंगे।
इसके लिए कुछ कीमत उन्हें चुकानी होगी। इस पर रंधावा ने क हा कि उनकी अमृतसर में दो दुकानें हैं, जिन पर भतीजों ने कब्जा कर रखा है। इस पर उनकी करीब आठ लाख में डील हो गई। रंधावा ने बताया कि उन्होंने 28 मार्च 2013 को उन्हें 2.20 लाख के चेक दे दिया, जबकि छह लाख रुपये नकद दे दिए, लेकिन उन्होंने उसका कोई काम नहीं किया।
उल्टा वे उसे धमकाने लगे। इसी बीच रंधावा ने उन्हें कहा कि वह सीएम बादल के समक्ष पेश हो जाएंगे। साथ ही उनकी सारी पोल खोल देंगे। वे डरकर फरार हो गए। एनआरआई ने 24 मार्च 2014 को एसएसपी को शिकायत दी। इस मामले की पुलिस ने जांच की। इसमें एनआरआई के आरोप सही पाए गए। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ 420, 465, 467,468 व 471 मामला दर्ज किया गया।