पंजाब के तरनतारन शहर के केवल 10 मोहल्लों में 600 महिला सेक्स वर्कर हैं। चौंकिए मत, ये दावा एनजीओ ऑल इंडिया वूमेन कान्फ्रेंस का है। ये संस्था एड्स को रोकने के लिए सेक्स वर्करों को जागरूक करने के लिए कार्य करती है।
इन्हें 600 महिला सेक्स वर्करों को ग्राहकों से सुरक्षित यौन संबध बनाने के प्रति जागरूक करने के लिए प्रति वर्ष लगभग 10 लाख रुपये की ग्रांट मिलती है।
शहर का बुद्विजीवी वर्ग सहमत नही
शहर में महिला सेक्स वर्करों की इतनी तादात से शहर का बुद्विजीवी वर्ग सहमत नही है। जिला शिकायत निवारण कमेटी के सदस्य हरी कृष्ण लाल अरोड़ा ने प्रशासनिक अधिकारियों और मानवाधिकार आयोग को पत्र लिखा है।
पत्र में आरोप लगाया है कि संस्था का कार्यालय तरनतारन के सिविल अस्पताल के पीछे मोहल्ला नानकसर की गली बाबिया वाली में एक छोटे से कमरे में है। ये संस्था पंजाब सरकार को शहर में महिला सेक्स वर्करों की गलत संख्या बताकर लाखों की ग्रांट हड़प रही है।
ये है सेक्स वर्करों की सच्चाई
हरी कृष्ण लाल अरोड़ा ने आगे आरोप लगाया कि सच्चाई ये है कि संस्था ने महिला सेक्स वर्करों को जागरूक करने के लिए आगे कुछ महिलाओं को कार्य सौंप रखा है। उक्त महिलाओं ने शहर के 10 मोहल्लों से 600 महिला सेक्स वर्करों की झूठी लिस्टें बनाकर सरकार को भेजी हैं।
संस्था सरकार से लाखों की ग्रांट हड़पने के लिए तरनतारन का नाम बदनाम कर रही है। ग्रांट के इस गौरखधंधे में शहर के 2 नामवर प्राइवेट अस्पताल भी शामिल हैं, जोकि फर्जी महिला सेक्स वर्करों के टैस्ट कर रिपोर्ट दे रहे है। यदि सरकार की ओर से संस्था की कार्यप्रणाली की जांच करवाई जाए तो बड़े स्तर पर ग्रांट का घोटाला सामने आ सकता है।
ये कहते हैं संबंधित अधिकारी
इस संबध में संस्था के प्रोजेक्ट मेनेजर सुनील कुमार ने कहा कि उनकी संस्था पारदर्शी ढंग से कार्य करती है। सरकार से मिलने वाली ग्रांट में कोई हेर-फेर नही किया जाता। हालांकि शहर में 600 महिला सेक्स वर्कर होने के सवाल पर उन्होंने कोई जवाब नही दिया।
इस मामले में तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर बलविंदर सिंह धालीवाल ने कहा कि यदि संस्था झूठे आकंडे़ भेज कर सरकारी ग्रांट का दुरुपयोग करती है तो उस पर कानून अनुसार कारवाई की जाएगी।