चंडीगढ़ यूटी सचिवालय में काम करने वाली पूजा का चार साल का बेटा है। पति प्राइवेट नौकरी करते हैं। दोनों को दफ्तर जाना होता है। दोनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बच्चे की देखभाल की है। कई बार उन्हें बच्चे को घर में अकेला छोड़ना पड़ जाता है। इस दंपती का कहना है कि स्कूल की छुट्टी के बाद उन्हें बच्चे की ही चिंता लगी रहती है।
अमर उजाला ने शहर के कई कार्यालयों का दौरा किया और जाना कि कहां क्रेच की सुविधा है और कहां नहीं। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि सिर्फ प्रशासन के तहत आने वाले विभागों में 25 हजार कर्मचारी हैं। इनमें महिलाएं लगभग एक तिहाई हैं। कई दफ्तर ऐसे हैं जहां महिलाओं की संख्या 100 से भी ज्यादा है, उसके बाद भी वहां क्रेच की सुविधा नहीं है।
यूटी प्रशासन ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर भी कार्य स्थल पर क्रेच के महत्व के बारे में बताया है। कहा गया है कि कामकाजी माता-पिता के लिए शहर में एक सुरक्षित और सुसज्जित क्रेच की आवश्यकता है। 300 से अधिक कर्मचारियों वाले सरकारी कार्यालय और 100 से अधिक कर्मचारियों वाले निजी कार्यालय परिसर में एक क्रेच प्रदान करने पर विचार कर सकते हैं, क्योंकि इससे कर्मचारियों की उत्पादकता में सुधार होगा।
यूटी सचिवालय, नगर निगम, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, शिक्षा निदेशालय, एस्टेट ऑफिस। इसके अलावा शहर के अन्य कई निदेशालय और कार्यालयों में क्रेच की व्यवस्था नहीं है।
कुछ विभाग ऐसे हैं जहां क्रेच की सुविधा उपलब्ध है। इनमें पंजाब पुलिस हेडक्वार्टर, आयकर भवन, पुलिस लाइन समेत अन्य कई दफ्तर शामिल हैं।
मैटरनिटी बेनिफिट (अमेंडमेंट) एक्ट 2017 के तहत सभी सरकारी, गैर सरकारी और फैक्ट्री में जहां कुल कर्मचारियों की संख्या 50 या उससे ज्यादा है, वहां महिलाओं के लिए क्रेच की सुविधा होनी चाहिए।
केंद्र सरकार के नियमों का सभी विभागों को पालन करना चाहिए। यूटी सचिवालय की जो नई इमारत बन रही है उसमें क्रेच की सुविधा होगी। अन्य विभागों के दफ्तर में भी इसकी व्यवस्था करनी चाहिए। - धर्मपाल, सलाहकार, यूटी प्रशासक