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घग्गर में पड़ी 200 फुट की दरार, पटियाला से लेकर संगरूर तक दहशत में लोग, घरों तक जा पहुंचा पानी

Sun, 21 Jul 2019 10:58 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला/संगरूर/फिरोजपुर (पंजाब)
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संगरूर में पानी के कहर से किसान परेशान - फोटो : अमर उजाला
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पटियाला में पातड़ां के गांव रसौली में घग्गर नदी के बांध में 200 फुट की बड़ी दरार पड़ गई। इससे रसौली समेत आसपास के कई गांवों में पानी भरने से फसलें बर्बाद हो गईं। हालांकि, 20 घंटे की जद्दोजहद के बाद दरार को बंद कर दिया गया। घग्गर नदी से शुतराणा के गांवों में पानी से मची तबाही से किसान अभी जूझ ही रहे थे कि रसौली में घग्गर नदी के बांध में 200 फुट की दरार ने मुश्किलें और बढ़ा दीं।

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देखते ही देखते भारी मात्रा में पानी रसौली समेत नाईवाला, जोगेवाल, गुलाहड़, होतीपुर, खांग समेत कई अन्य गांवों के खेतों में भर गया। इससे धान की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। किसानों ने सरकार से मुआवजे की मांग की है। ड्रेनेज विभाग की टीम ने जेसीबी मशीनों की मदद से 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बंद किया।

इस दौरान तहसीलदार हरजीत सिंह और नायब तहसीलदार राजवरिंदर सिंह भी मौजूद रहे। पातड़ां में घग्गर नदी के बांध और किनारों में लगातार पड़ रही दरारों के मद्देनजर सिविल व पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने यहां फिलहाल पक्का डेरा लगा लिया है ताकि किसी भी तरह की आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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तीसरे दिन भी नहीं भर पाई घग्गर में पड़ी दरार 

तीसरे दिन भी नहीं भरी दरार - फोटो : अमर उजाला
संगरूर के मूनक के पास घग्गर नदी में पड़ी दरार को पाटने में प्रशासन तीसरे दिन भी नाकाम रहा। दरार से निकल रहा पानी तेजी से मूनक शहर व अन्य गांवों तक पहुंच गया है। चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। दो गांवों सुरजन भैणी व भूंदड़ भैणी का संपर्क टूट गया। मूनक के सभी स्कूल भी बंद कर दिए गए हैं। पानी ने किसानों की करीब पांच हजार एकड़ फसल बर्बाद कर दी।

बता दें कि बुधवार सुबह घग्गर नदी में साठ फुट की दरार पड़ गई थी। इसे भरने के लिए प्रशासन ने एनडीआरएफ और सेना को बुलाया था। पानी के तेज बहाव के कारण दरार भरने में मुश्किल हो रही है। इसके अलावा दरार तक पहुंचने के लिए घग्गर नदी पर बना पुल बेहद छोटा है जिससे किसी वाहन को नहीं गुजारा जा सकता है।

ऐसे में साजो सामान इसी रास्ते से पैदल और किश्तियों के जरिए ही पहुंचाया जा रहा है। दरार भरने के लिए सूखी मिट्टी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रही। प्रशासन 100 फुट तक पहुंच चुकी दरार को महज 35 फुट तक ही भर पाया है। अब भी 60 से 65 फुट तक दरार से पानी तेजी से बह रहा है।

फिरोजपुर में भी खस्ताहाल बांध ने बढ़ाई चिंता - फोटो : अमर उजाला
हालात यह बन गए हैं कि लोगों ने अपने घरों के आगे मिट्टी के थैलों से बांध बनाने शुरू कर दिए हैं। खाने-पीने का सामान जुटाना शुरू कर दिया गया है। लोगों के लिए सबसे बड़ी समस्या पशुओं के लिए हरे चारे की आ रही है।  

मूनक के कॉलेज के पास रहने वाले शविंदर सिंह के मुताबिक यदि पानी का इसी तरह घरों की तरफ बढ़ना जारी रहा तो उनके लिए मुश्किलें पैदा कर देगा। गांव में पानी घुसने की वजह से कच्चे घरों में दरारें पड़नी शुरू हो गई है। लोगों ने अपना सामान छतों पर संभालना शुरू कर दिया है लेकिन किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने आकर उन्हें इससे आगाह होने तक की बात नहीं कही। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति रोष है।

दूसरी तरफ, पानी मूनक के बिजली ग्रिड के पास लगभग पहुंच चुका है। जल्द ही ग्रिड चारों तरफ से पानी के साथ घिर जाएगा। यदि इस ग्रिड की बिजली सप्लाई बंद होती है तो इससे मूनक सहित करीब दस गांवों की बिजली सप्लाई प्रभावित होगी।

उधर, जिला प्रशासन लगातार दरार पड़ने वाली जगह का लगातार जायजा ले रहा है। राहत कार्यों में जुटी टीमों से संपर्क बनाए हुए हैं। एसडीएम मूनक सूबा सिंह ने बताया कि दरार को भरने का कार्य किया जा रहा है लेकिन पानी का बहाव व साजो सामान लाने में थोड़ी मुश्किल हो रही है।
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धुस्सी बांध की हालत खस्ता

पहाड़ों पर लगातार मूसलाधार बारिश होने से सतलुज नदी का जलस्तर बढ़ता ही जा रहा है। जैसे-जैसे नदी का जलस्तर बढ़ रहा है तो वैसे ही इसके किनारे बसे फिरोजपुर में लोगों की रात की नींद उड़ गई है। वह रात को भी नदी के पानी की निगरानी करते हैं।

नदी पर बना धुस्सी बांध कई जगहों से हालत खस्ता है, दरारें पड़ी हुई हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर बांध टूटने का खतरा भी हो सकता है। वर्ष 1988 में धुस्सी बांध की हालत खस्ता होने के कारण टूट गया था इससे फिरोजपुर शहर को बहुत नुकसान हुआ था।

किसान रेशम सिंह व संतोख सिंह ने बताया कि धुस्सी बांध के कई हिस्सों में दरारें पड़ी हैं जो ऐसे मौसम में बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। पहाड़ों पर बारिश होने के कारण सतलुज नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी के आसपास कई गांव बसे हैं जिन्होंने धान की फसल के अलावा अन्य फसलें बीजी हुई हैं। 

कई जगहों पर किसानों ने खुद बांध की दरारें भरी हैं। गांव अलीके के रहने वाले ग्रामीण बग्गा सिंह ने बताया कि वर्ष 1988 में धुस्सी बांध में चूहों ने गड्ढे बनाए हुए थे। जैसे ही दरिया का पानी बांध के साथ लगा बांध टूट गया था। उस समय काफी नुकसान हुआ था। अब भी कई स्थानों पर बांध पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ी हैं। सिंचाई विभाग की तरफ से उन्हें दुरुस्त नहीं किया गया है। दरिया के पार लगभग 22 गांव बसे हैं।
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