विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार की लहर में बच्चों पर ही खतरा रहेगा क्योंकि अब भी कई आयु वर्ग के बच्चे टीके से वंचित हैं। ऐसे में अगर चौथी लहर आने पर स्थिति बिगड़ी तो फिर बच्चों को इलाज देना मुश्किल होगा। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि उनके पास सेक्टर-45 और जीएमएसएच-16 में बच्चों के आईसीयू बेड उपलब्ध हैं।
हर बार मिल रही अगली तारीख
कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्वास्थ्य विभाग को इमरजेंसी कोविड रिस्पॉन्स पैकेज-2 के तहत 5.6 करोड़ रुपये मिले थे। इससे बच्चों के लिए 32 बेड का कोविड डेडिकेटेड अस्पताल बनाया जाना था। सरकार के निर्देशानुसार इस अस्पताल का निर्माण 15 नवंबर 2021 तक पूरा होना था लेकिन यह तिथि कार्य योजना बनाने में ही निकल गई।
आलम यह है कि जिस अस्पताल के लिए स्वास्थ्य विभाग को न तो अलग से बिल्डिंग बनानी है न ही मानव संसाधन की व्यवस्था करनी है, उसे लेकर ऐसी अनदेखी है। स्वास्थ्य विभाग की धीमी रफ्तार के कारण इस अस्पताल के निर्माण की अवधि बढ़ाकर जनवरी 2022 की गई लेकिन इस बार भी निराशा ही हाथ लगी।
स्वास्थ्य विभाग के पास बच्चों के आईसीयू की व्यवस्था है। जहां तक बच्चों के कोविड डेडिकेटेड अस्पताल के निर्माण में विलंब की बात है तो उसे पूरा करने में तीन विभाग जुटे हुए हैं। इसके लिए कोई तय समय सीमा नहीं बताई जा सकती लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही काम पूरा हो जाएगा। -डॉ. सुमन सिंह, स्वास्थ्य निदेशक।