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छेड़छाड़ केस में बरी होते ही तीनों युवकों ने ली राहत की सांस, बस एक चीज का मलाल

Sun, 05 Mar 2017 09:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
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रोहतक सिस्टर्स
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रोहतक सिस्टर्स के साथ छेड़छाड़ केस में बरी होने के बाद तीनों युवकों ने राहत की सांस ली, लेकिन एक चीज का मलाल उन्हें सारी जिंदगी रहेगा। शुक्रवार को दो सगी बहनों से छेड़छाड़ और मारपीट के आरोप से तीनों युवक आरोप मुक्त हो गए। स्थानीय अदालत ने तीनों युवकों को निर्दोष माना है। इसके बाद तीनों युवकों के घर खुशी का माहौल है। देर रात तक गांव वाले इनके घर खुशी जताने आते रहे।
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तीनों युवक घटना के बाद पहली बार वह खुलकर हंसे, लेकिन सेना की नौकरी के लिए उम्र निकल से तीनों काफी निराश है। उनके परिजनों ने भी अफसोस जताया। ये एक टीस है, जो उनके मन में सारी जिंदगी रहेगी। कुलदीप के पिता बलबीर सिंह ने बताया कि वह 31 अगस्त 1995 को सेना से रिटायर हो गए थे। घटना से पहले कुलदीप सेना में भर्ती की तैयारी कर रहा था।

उसने दौड़ और फिजिकल टेस्ट पास कर लिए थे। केवल लिखित परीक्षा पास करनी बाकी थी। दुर्भाग्य से यह मामला घटित हो गया। उन्होंने बताया कि जो नौकरी उनके बेटे को मिलने वाली थी, वह छिन गई। अब कुलदीप की सेना के लिए उम्र निकल चुकी है। वहीं, दूसरे युवक दीपक की भी उम्र सेना की नौकरी के लिए निकल चुकी है। कुलदीप और दीपक दिल्ली पुलिस में भर्ती की तैयारी कर रहे हैं। जबकि मोहित आगे की पढ़ाई में जुटा है।
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तीनों युवकों के परिजनों ने सरकार से मांगी नौकरी और सम्मान

रोहतक सिस्टर्स
तीनों युवकों के अदालत से आरोप मुक्त होने की जानकारी जब मामले की मुख्य गवाह रही गढ़ी सिसाणा गांव की बुजुर्ग बिमला देवी को हुई तो उन्होंने कहा कि सच की जीत हुई है। उन्होंने बताया कि लड़कों ने किसी से छेड़खानी नहीं की थी। सीट को लेकर विवाद हुआ था, लेकिन इसे गलत तरीके से पेश किया गया।

कुलदीप के पिता बलबीर सिंह, मोहित के पिता हरीश सिंह, दीपक के पिता श्रीपाल सिंह हुड्डा और बिमला देवी ने कहा कि आरोप लगाने वाली लड़कियों को सरकार ने 26 जनवरी को सम्मानित करने का फैसला लिया था। सरकार को अब इन युवकों का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सरकार को तीनों युवकों को सरकारी नौकरी देनी चाहिए।

दो जाट कॉलेज तो एक नेकीराम कॉलेज का छात्र
तीनों युवकों में से कुलदीप और दीपक जाट कॉलेज में बीए फाइनल ईयर के छात्र हैं। जबकि तीसरा युवक मोहित पंडित नेकीराम शर्मा कॉलेज में बीए फाइनल ईयर में पढ़ता है। तीनों युवकों का अभी छठे सेमेस्टर का रिजल्ट आना बाकी है।

बोले युवक, खोया सम्मान मिला
तीनों युवक कुलदीप, दीपक और मोहित ने बताया कि कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें अपना खोया सम्मान मिल गया है। कुलदीप ने बताया कि इस घटना के बाद उनकी और उनके गांव की बहुत बदनामी हो रही थी। लोग कहते थे कि अरे ये तो बस कांड वाला है या बस कांड वाले गांव का है। कुलदीप ने बताया कि अब लोग सम्मान से गांव का नाम लेंगे।
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बस की घटना की कहानी, बुजुर्ग महिला की जुबानी

रोहतक सिस्टर्स
मामले की मुख्य रही बुजुर्ग महिला बिमला देवी ने बताया कि उस दिन मैं बस में सफर कर रही थी। मैंने ही कुलदीप से टिकट लेने के लिए कहा था। इसके बाद कुलदीप ने टिकट कटाई और मुझे सीट पर बैठाने के लिए गया तो उस पर दो लड़कियां बैठी थीं। जब कुलदीप ने दोनों लड़कियों से कहा कि यह ताई की सीट है तो दोनों लड़कियों की उससे कहासुनी हो गई।

इसके बाद बिमला ने कुलदीप को मना कर दिया। लेकिन इसी बीच लड़कियों ने अपना मोबाइल निकाला और एक औरत को वीडियो बनाने के लिए कहा। इसके बाद बेल्ट निकाल कर कुलदीप की पिटाई करने लगी। कुलदीप ने बस से उतर कर खेतों में भागकर जान बचाई थी। बिमला देवी ने बताया कि उस दिन वह घर आ गईं। एक दिन बाद जब टीवी पर इन लड़कों के ऊपर आरोप लगते देखा तो आश्चर्यचकित रह गईं।

बताया कि उन्हें लगा कि लड़कों के साथ गलत हो रहा है। इसके बाद उन्होंने लड़कों का साथ देने की सोची और बेटे से उनके बारे में पता करने को कहा। अखबार से युवकों के गांव का पता चला तो उनके घर गई। यहीं से मामले में मोड़ आ गया। बिमला देवी ही मामले की मुख्य गवाह बनीं।

तीनों युवकों के लिए दूसरी मां हैं बिमला देवी
तीनों युवक मामले की मुख्य गवाह बिमला देवी को अपनी दूसरी मां मानते हैं। युवकों ने बताया कि उनकी वजह से ही उन्हें दूसरा जीवन मिला है। वह बिमला देवी के घर को अब अपना घर जैसा समझते हैं। बेहद विषम परिस्थिति में बिमला देवी ने उनका साथ दिया और अंत तक दिया।
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