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सर्वे रिपोर्टः लॉकडाउन में रहते हुए डर और डिप्रेशन से सुसाइड तक के ख्यालों से घिर रहे हैं लोग

Thu, 14 May 2020 11:05 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, चंडीगढ़

सार

  • मन आत्महत्या जैसे ख्यालों से घिरने लगा है
  • स्टेट हेल्पलाइन नंबर 1057 का करें उपयोग
  • बच्चों पर झल्लाहट, महामारी से मरने का डर भी बढ़ा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोरोना महामारी फैलने से लगे लॉकडाउन में 51 दिन से अपने घरों में कैद हुए कई लोगों की मानसिक स्थिति अब विचलित होने लगी है।
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अजीब तरह का डर, भविष्य को लेकर अस्थिरता, तनाव और एक अजीब तरीके की चिंता ने लोगों को इस कदर अवसाद ग्रस्त कर दिया है कि उनका मन आत्महत्या जैसे ख्यालों से घिरने लगा है। यह खुलासा हरियाणा स्वास्थ्य विभाग की मेंटल हेल्थ डिवीजन की ओर से कराए जा रहे सर्वे में हुआ है, जिसे देखते हुए हेल्थ डिपार्टमेंट न केवल सतर्क हो गया है, बल्कि विभाग ने लोगों को अवसाद से निकालने के लिए कमर भी कस ली है।

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हरियाणा सरकार के आदेशों के बाद स्वास्थ्य विभाग की मेंटल हेल्थ डिवीजन ने अवसाद ग्रस्त लोगों की मदद व उनकी काउंसिलिंग करने के लिए 211 स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्वैच्छिक वॉलंटियर्स की टीम मैदान में उतार दी है। मेंटल हेल्थ सर्विस की निदेशक एवं स्टेट प्रोग्राम ऑफिसर डॉ. वीणा सिंह के नेतृत्व में ये टीम एक स्टेट हेल्पलाइन नंबर 1057 के साथ काम में जुटी है।

अचानक परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी कि लोग विचलित हुए

निदेशक डॉ. वीणा सिंह ने बताया कि घरों में खाली बैठकर कामकाजियों, बुजुर्गों व पहले से ही किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों में सुसाइड करने जैसे ख्याल आना वाकई चिंता का विषय है। लेकिन उन्हें अवसाद से बाहर निकालने के लिए हरियाणा सरकार की ओर से एक विशेष मेंटल एक्सरसाइज शुरू की गई है।

उन्होंने बताया कि हेल्पलाइन नंबर पर रोजाना इसी तरह की समस्याओं के फोन कॉल आ रहे हैं, जिनका समाधान हमारे विशेषज्ञ कर रहे हैं। मानसिक इलाज के विभिन्न तरीकों से न केवल अवसाद ग्रस्त लोगों का इलाज किया जा रहा है, बल्कि हमारे प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा फोन पर ही उनकी काउंसिलिंग भी की जा रही है।

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डॉ. वीणा के मुताबिक, अचानक परिस्थितियां कुछ ऐसी बनी हैं कि भविष्य की अस्थिरता, चिंता और महामारी का डर लोगों की मनोदशा पर हावी हो रहा है और यह ठीक नहीं है। ऐसे में लोगों को तमाम अफवाहों, मन विचलित और भय पैदा करने वाली करने वाली जानकारियों व सूचनाओं से दूर रहते हुए सरकार की नीतियों, प्रयासों और अपीलों पर ही अपने मन को एकाग्र करके आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि जिंदगी यहीं खत्म होने का नाम नहीं है।
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बच्चों पर झल्लाहट, महामारी से मरने का डर भी बढ़ा

सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि घरों में बैठे कामकाजी लोग बच्चों पर ज्यादा झल्लाने लगे हैं। हर छोटी शरारत पर उन्हें सख्ती से डांटने लगे हैं। इतना ही नहीं चाइल्ड एब्यूजिंग तक के मामले आ रहे हैं, जिसकी वजह से उनके अपनी पत्नियों से झगड़े हो रहे हैं, जो बाद में घरेलू हिंसा का कारण बनते हैं। इसके अलावा पहले किसी बीमारी से ग्रस्त लोग यह सोच कर ज्यादा परेशान हो रहे हैं कि यदि उन्हें कोरोना संक्रमण हो गया तो कहीं उनकी मौत न हो जाए।

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विशेषज्ञ बोले, इन बातों का ख्याल रखें
- स्कूल बंद हैं, बच्चे घर पर हैं, सारा दिन उन्हें टीवी से न जोड़ें रखें। उनमें रीडिंग व क्रिएटिव आदतें पैदा करें।
- परिवार संग रोजाना व्यायाम, योग, मेडिटेशन, इंडोर गेम्स इत्यादि की रूटीन बनाएं।
- सोशल डिस्टेंसिंग के इस दौर में सोशल इमोशनल रहते हुए संबंधियों व दोस्तों के साथ सोशल मीडिया के जरिए सकारात्मक विचारों के साथ जुड़े रहें।
- खानपान का खास ध्यान रखें और व्हाट्सऐप के जरिए आ रहे बच्चों के होमवर्क में भी मददगार बनें।
- घर का माहौल पॉजिटिव बनाते हुए परिजनों के साथ खुश रहने की कोशिश करें।
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