चंडीगढ़। अपने भोजन की आदत में बदलाव कर हम सभी जल संरक्षण कार्यक्रम में योगदान दे सकते हैं। मोटे अनाज यानी मिलेट्स खाने की आदत डालिए। ये सेहत के लिए बेहतर आहार होने के साथ ही हमारी भूमि और जन के लिए भी वरदान है क्योंकि मिलेट्स की पैदावार बेहद कम पानी में आसानी से की जा सकती है। यह बातें पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने वीरवार को होटल जेडब्ल्यू मैरियट में केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की तरफ से आयोजित कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।
नेशनल एक्विफर मैपिंग एंड मैनेजमेंट (एनएक्यूयूआईएम) प्रोग्राम में उन्होंने जल संरक्षण के उपायों के प्रयोग की अपील की। विशेषज्ञों से कहा कि कार्यशाला में ऐसा पेपर तैयार करें जो जल संरक्षण के क्षेत्र में देश का भविष्य तय करने में सहायक साबित हो। भूजल राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, जल और खाद्य सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। उन्होंने भूजल प्रबंधन में प्रमुख चुनौतियों-भूजल स्तर में कमी, भूजल की गुणवत्ता में गिरावट, कमांड क्षेत्रों में जलभराव का उल्लेख किया और फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय के विभिन्न प्रयासों और योजनाओं जैसे नमामि गंगे, जल शक्ति अभियान आदि के बारे में बात की। यह कार्यशाला हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, जम्मू और लद्दाख राज्यों के सहयोग से आयोजित की गई थी। कार्यक्रम में पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित मुख्य अतिथि थे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में पंजाब के राज्यपाल की प्रमुख सचिव राखी गुप्ता भंडारी, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की अध्यक्ष केशनी आनंद अरोड़ा, पंजाब जल संसाधन विकास प्राधिकरण के सदस्य सुशील गुप्ता और सीजीडब्ल्यूबी के अध्यक्ष सुनील कुमार थे। कार्यशाला में लगभग 200 वैज्ञानिक अधिकारियों और गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।