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चंडीगढ़: पीजीआई में 4000 कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, मरीजों का इलाज शुरू, सिक्योरिटी गार्ड भी काम पर लौटे

Fri, 25 Mar 2022 09:06 AM IST
ajay kumar विक्रम सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

अनुबंध कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने की सूचना पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन व केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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पीजीआई चंडीगढ़ में हड़ताल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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समान काम-समान वेतन की मांग को लेकर पीजीआई के अनुबंधकर्मियों ने शुक्रवार सुबह छह बजे हड़ताल कर दी। इससे पीजीआई की स्वास्थ्य सेवाएं ठप हो गईं। हड़ताली अनुबंधकर्मी पीजीआई निदेशक के दफ्तर के बाहर जमा होकर प्रदर्शन करने लगे। उधर, इलाज के लिए पहुंचे मरीज और उनके परिजन हड़ताल की सूचना से परेशान हो गए और हंगामा शुरू कर दिया। 

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बैरिकेडिंग तोड़कर मरीज और तीमारदार ओपीडी में अंदर घुस गए। हालात बेकाबू होते देख बीएसएफ को मोर्चा संभालना पड़ा। चार घंटे बाद लगभग 10 बजे अनुबंध कर्मचारियों ने हाईकोर्ट का आदेशपत्र मिलने के बाद अपनी हड़ताल खत्म कर दी। तब जाकर मरीजों का इलाज शुरू हुआ। 

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शुक्रवार सुबह चंडीगढ़ समेत आसपास के राज्यों से बड़ी संख्या में मरीज और उनके तीमारदार इलाज कराने पीजीआई पहुंचे तो ओपीडी समेत अन्य विभागों के सामने बैरिकेडिंग देख हैरान रह गए। 

मौके पर तैनात सुरक्षा बलों से जब पूछताछ की तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इधर-उधर भटकने के बाद जब लोग परेशान हो गए तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। भड़के तीमारदारों ने स्ट्रेचर लगाकर की गई बैरिकेडिंग तोड़ दी और ओपीडी के अंदर घुस गए। हालात बिगड़ते देख बीएसएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला और अंदर घुसे लोगों को ओपीडी से बाहर निकाला। इस दौरान कुछ लोगों से उनकी झड़प भी हुई। 

लगभग 10 बजे कर्मचारी यूनियन को हड़ताल पर रोक लगाने संबंधी हाईकोर्ट का आदेशपत्र मिला, इसके बाद कर्मचारियों ने हड़ताल स्थगित करने का निर्णय लिया और काम पर लौट आए।



                                            एडवांस आई सेंटर में बैठे मरीज


मरीजों तक समय पर नहीं पहुंचीं हड़ताल की जानकारी इसलिए जुटी भीड़  
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पीजीआई ने ओपीडी बंद रखने और सामान्य सर्जरी टालने के निर्देश गुरुवार रात को ही जारी कर दिए थे लेकिन मरीजों तक यह जानकारी पहुंचने में देर हो गई। इस कारण कैंसर, सर्जरी और अन्य गंभीर बीमारियों के मरीज पीजीआई परिसर में सुबह भटकते रहे। उन्हें सही से जानकारी देने वाला भी परिसर में कोई नहीं था। 

                                                  जगह-जगह पड़ा मेडिकल कचरा।

बिजनौर से आए हैं, मेरे भाई के पैरों में समस्या है, वो चल नहीं पाता है। इसको दिखवाने हम यहां आए है़ं। सुबह पांच बजे से यहां इंतजार कर रहे है । -मोबिना, बिजनौर 

 

मेरा आठ साल का बेटा अपने पैरों पर खडा नहीं हो पाता है। इसका इलाज कालका में चल रहा था। कोई फायदा न मिलने पर पीजीआई लेकर आए हैं।  सुबह से इलाज की उम्मीद में बैठे हैं और धक्के खा रहे हैं। -मुन्ना, कालका

 

कैथल के रहने वाले धर्मपाल ने बताया कि दादा को लिवर में जख्म है और दिल की बीमारी है। गुरुवार को दो बजे यहां पहुंचे। मगर शाम को पता चला कि कर्मचारियों की हड़ताल है। डॉक्टर सोमवार और शुक्रवार को ही बैठते है। अब अगले हफ्ते ही आएंगे।




मरीज और तीमारदार जब अपना सवाल लेकर बैरिकेडिंग पर तैनात सुरक्षाकर्मियों के पास पहुंचे तो उनका दो टूक जवाब था कि ‘आप लोग घर लौट जाएं। इलाज मिल पाएगा या नहीं, इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है।’ ओपीडी और अन्य विभागों में इलाज व सर्जरी के लिए आए अधिकांश मरीज यूपी, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, बिहार, पंजाब, हिमाचल प्रदेश से थे। 



कई गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ा। मरीजों का कहना था कि वो एक दिन पहले ही अपने घर से पीजीआई में इलाज के लिए चल पड़े थे, इसलिए उन्हें हड़ताल की कोई जानकारी नहीं थी। वहीं कई मरीजों को गुरुवार को ही डॉक्टरों ने जांच और सर्जरी के लिए तारीख दी थी, लेकिन शुक्रवार को हड़ताल के कारण डॉक्टर देख नहीं रहे थे।  



पर्ची बनवाने के लिए धक्का-मुक्की, कई मरीज लौट गए 
हड़ताल खत्म होने के बाद सुबह साढ़े 10 बजे ओपीडी की पर्ची और पूछताछ खिड़की खुली। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। ओपीडी की पर्ची बनवाने के लिए कतारें लग गईं। इस दौरान लाइनों में लगने के लिए धक्का-मुक्की भी हुई। हालांकि सुरक्षाकर्मी, हॉस्पिटल अटेंडेंट और सफाई कर्मचारी 11 बजे के करीब अपने काम पर पहुंचे। इतनी देरी तक बहुत से मरीज परेशान होकर घर लौट गए थे।

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कर्मचारियों से बातचीत के बजाय कोर्ट पहुंच गया पीजीआई प्रशासन: अश्विनी मुंजाल   
पीजीआई अनुबंध कर्मचारी संघ के चेयरमैन अश्विनी मुंजाल ने कहा कि पीजीआई प्रशासन ने कर्मचारियों से कोई बातचीत नहीं की। कर्मचारियों से बात करने के बजाय प्रशासन कोर्ट पहुंच गया। हम प्रशासन को इससे पहले भी 22 फरवरी और 8 मार्च को नोटिस भेज चुके हैं लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इस कारण हमें मजबूरन हड़ताल करनी पड़ी। हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी मिलने के बाद हमने सुबह 9 बजे कर्मचारियों को काम पर लौटने को कह दिया और हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके बाद 10 बजे तक कर्मचारी काम पर लौट आए थे।



असमंजस में रहे कर्मचारी, दोपहर तक बैठे रहे धरनास्थल पर 
यूनियन की ओर से हड़ताल खत्म करने की घोषणा के बाद भी सैकड़ों कर्मचारी धरनास्थल पर ही डटे रहे। कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि काम पर जाएं या धरने पर बने रहें क्योंकि हम अपनी मांगों को लेकर 24 घंटे की हड़ताल पर आए हैं। हमारी मांगे पीजीआई प्रशासन ने नहीं मानी हैं, ऐसे में हम वापस क्यों जाएं। हालांकि यूनियन के चेयरमैन अश्विनी मुंजाल का कहना है कि शाम की ड्यूटी वाले कर्मचारी ही धरना स्थल पर मौजूद थे, बाकी काम पर लौट आए थे। 



कुछ समस्या हुई, उसके बाद स्थिति नियंत्रण में आ गई
कर्मचारियों की हड़ताल के कारण थोड़ी समस्या हुई थी लेकिन बाद में स्थिति नियंत्रण में आ गई। पूरे दिन में 2727 जांचों के साथ ही 83 सामान्य सर्जरी की गईं। पंजीकरण का समय भी बढ़ा दिया गया था। शाम को भी कुछ इमरजेंसी सर्जरी की गईं। इस मसले को जल्द सुलझा लिया जाएगा। -प्रो. अशोक कुमार, प्रवक्ता पीजीआई
 
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