हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर नियंत्रण न कर पाने को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका पर राज्य सरकार ने कहा है कि वह दोषियों के साथ सख्ती से निपटेगी। जस्टिस राजेश बिंदल की कोर्ट में मंगलवार को दाखिल जवाब में हरियाणा सरकार ने कहा कि वह मामले में गंभीर है। आंदोलन के दौरान हिंसा और आगजनी के लिए जिन लोगों ने अन्य लोगों को उकसाने का काम किया, राज्य सरकार उनके खिलाफ सख्त कदम उठा रही है।
सरकार ने यह भी कहा कि आंदोलन के बीच अराजकता फैलाने वाले लोगों की पहचान कर पिछले दिनों कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा है कि अखबारों में खबरें छपने के बाद ही सरकार की ओर से कुछ कदम उठाए गए, आखिर यह पहले क्यों नहीं किया गया। इस पर सरकार की ओर से कहा गया कि सरकार राज्य में शांति बनाए रखने पर हर तरह के उपाय कर रही है। इसी मामले में हरियाणा के गृह सचिव की तरफ से भी आंदोलन से निपटने के लिए उठाए गए कदम की जानकारी कोर्ट को दी गई। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए कार्ययोजना भी कोर्ट को सौंपी।
हरियाणा में जाट आरक्षण की मांग को लेकर उपद्रव को सरकार की ओर से नियंत्रित न कर पाने के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस पर पहले तो प्रदेश सरकार ने सख्ती दिखाने और किसी कीमत पर उपद्रव न होने का भरोसा अदालत को दिलाया था, लेकिन इस साल फरवरी में आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को लेकर फिर से हाईकोर्ट में सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल की गई है।