पार्टी लाइन से हटकर सूबे में अपनी गतिविधियों को जारी रखते हुए पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने सोमवार शाम मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात की। दोनों के बीच यह मुलाकात 40 मिनट तक चली।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सिद्धू ने कहा कि वह फूलों का कोई गुलदस्ता लेकर नहीं गए थे क्योंकि वह मान को सीएम बनने के लिए पहले ही बधाई दे चुके हैं। सिद्धू ने भगवंत मान की तारीफ करते हुए कहा, "सीएम मान में कोई अहंकार नहीं है। वह पहले की तरह जमीन से जुड़े हैं। मैंने कुछ भी नया मुद्दा नहीं उठाया और सीएम के साथ केवल उन्हीं मुद्दों पर चर्चा की, जिन्हें मैं पहले से पंजाब के कल्याण के लिए उठाता रहा हूं।
" सिद्धू ने आगे कहा- "मैंने कभी व्यक्तिगत हमले नहीं किए। मेरे पास मेरी आत्मा की आवाज है। मैंने कहा कि जिस दिन हम रेत और शराब में ठेका प्रणाली को खत्म कर निगम के अधीन लाएंगे, सब कुछ ठीक हो जाएगा। दिल्ली का फॉर्मूला पंजाब में कारगर साबित नहीं होगा।" मुलाकात के दौरान सिद्धू ने पंजाब की अर्थव्यवस्था को बेहतर बनाने और सूबे का राजस्व बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री मान को कई टिप्स दिए। सिद्धू ने इस मुलाकात को सकारात्मक बताया।
उधर, पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) सिद्धू के इस नए पैंतरे को विभिन्न पहलुओं के आधार पर तौलने लगी है। पार्टी का मानना है कि सिद्धू के लिए आप के दरवाजे तो बंद हो चुके हैं, फिर भी सिद्धू मुख्यमंत्री से मुलाकात के सहारे खुद को पंजाब के हितों की चिंता करने वाले नेताओं में सबसे आगे दिखाई देना चाहते हैं। इसके अलावा, यह भी माना जा रहा है कि सिद्धू उक्त मुलाकात के सहारे कांग्रेस हाईकमान को यह दिखाना चाहते हैं कि वह पंजाब में राजा वड़िंग के मुकाबले ज्यादा सक्रिय हैं। सिद्धू द्वारा इससे पहले सूबे में कांग्रेस सरकार के समय मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा लिए जाने वाले फैसलों में हस्तक्षेप किसी से छिपा नहीं है। हालांकि तब सिद्धू के पास पार्टी प्रधान के रूप में काफी अधिकार थे, लेकिन कांग्रेस में उनकी स्थिति बदल चुकी है। कांग्रेस हाईकमान उन्हें लगातार अनदेखा कर रहा है, वहीं सूबे के कांग्रेसी नेता भी उनसे दूरी बनाते जा रहे हैं।