दूसरी ओर, पार्टी के रुख ने नवजोत सिद्धू की भी चिंता भी बढ़ा दी है। दरअसल, इस्तीफे के बाद से राज्य कांग्रेस में सिद्धू अलग-थलग पड़ गए हैं। उनके इस्तीफे के पक्ष में चन्नी मंत्रिमंडल से रजिया सुलताना को छोड़ अन्य किसी भी मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया। यहां तक की सिद्धू के सबसे करीबी रहे परगट सिंह भी मंत्री की कुर्सी पर बने हुए हैं।
पार्टी के अन्य सीनियर नेता, जिनमें तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा और सुखजिंदर सिंह रंधावा शामिल हैं, ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद से हटाने में सिद्धू का साथ दिया था लेकिन अब चन्नी मंत्रिमंडल में शामिल होने के बाद वह भी सिद्धू से किनारा कर गए। इस्तीफे की खबर के बाद सिद्धू के पटियाला स्थित आवास पर केवल तीन मंत्री पहुंचे, जिनमें से दो मंत्री तो मुख्यमंत्री द्वारा कारण जानने के लिए भेजे गए थे। मुख्यमंत्री चन्नी भी उनसे मिलने नहीं गए बल्कि बातचीत के लिए सिद्धू को पंजाब भवन बुला लिया। इस तरह अब सिद्धू ने भी मान लिया है कि प्रदेश कांग्रेस में उनके समर्थकों की भीड़ छंट चुकी है।
घिरता देख सिद्धू राहुल प्रियंका का कर रहे गुणगान
हाईकमान के सूत्रों के अनुसार, पार्टी मुख्यमंत्री चन्नी की कार्यशैली से खुश है और अगले चुनाव में चन्नी को ही मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किए जाने का फैसला कर चुकी है। कैप्टन के इस्तीफे के बाद नवजोत सिद्धू द्वारा अब चन्नी सरकार के खिलाफ शुरू की गई बयानबाजी ने हाईकमान को यह मानने पर मजबूर कर दिया है कि चुनाव के दौरान सिद्धू पार्टी के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
वहीं, हाईकमान के इरादों की भनक लगते ही सिद्धू भी सचेत हो गए हैं और उन्होंने चन्नी सरकार की आलोचना छोड़ अपने ट्विटर पर राहुल और प्रियंका गांधी का गुणगान शुरू कर दिया है। मंगलवार को भी उन्होंने ट्वीट किया कि वे राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ खड़े रहेंगे।