चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी सीनेट के संकाय वर्ग चुनाव में कांग्रेस समर्थित गोयल ग्रुप का कब्जा हो गया है। सभी छह सीटों पर प्रत्याशियों की जीत हुई है। भाजपा के हाथ एक भी सीट नहीं लगी। दोनों ही दलों के कुछ मंत्री व नेता वोट डालने पहुंचे थे। भाजपा अपनी हार के कारणों की समीक्षा कर रही है।
पीयू के लॉ ऑडिटोरियम में सुबह नौ से शाम सात बजे तक मतदान हुआ। छह सीटों के लिए 12 उम्मीदवार मैदान में थे। हर संकाय के लिए मतदान का समय निर्धारित था। एक संकाय के मतदान होने के बाद उनकी मतगणना हुई। परिणाम जैसे ही गोयल ग्रुप के पक्ष में आने लगे तो सभी के चेहरे खिल उठे। वहीं भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की धड़कने बढ़ने लगीं। शाम सात बजे तक सभी संकायों के परिणाम आ चुके थे। इसमें गोयल ग्रुप की बड़ी जीत हुई। कला संकाय से जहां प्रो. रोनकी राम ने जीत हासिल की, वहीं मेडिकल साइंस संकाय से अशोक गोयल ने। भाषा संकाय से प्रो. राजेश गिल, कंबाइंट संकाय से प्रो. केशव मल्होत्रा, विज्ञान संकाय से प्रो. नवदीप गोयल और कानून संकाय से अनु चतरथ विजेता बनीं। इस चुनाव के लिए कुल 755 वोटर थे।
किसेे कितने वोट मिले
कला संकाय
प्रो. रोनकी राम : 53
प्रो. अंजू सूरी : 47
मेडिकल विज्ञान संकाय
अशोक गोयल : 47
डॉ. सर्वदीप सिंह : 29
भाषा संकाय
प्रो. राजेश गिल : 48
डॉ. गुरपाल सिंह संधू : 35
कंबाइंड संकाय
प्रो. केशव मल्होत्रा : 141
प्रो. नवल किशोर : 107
विज्ञान संकाय
प्रो. नवदीप गोयल : 90
प्रो. प्रोमिला पाठक : 38
कानून संकाय
अनु चतरथ : 37
जगजोत सिंह लल्ली : 10
कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों की जीत के कारण
कांग्रेस समर्थित प्रत्याशियों की जीत का प्रमुख कारण यही माना जा रहा है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी को बखूबी समझा है और हर वोटर पर उनकी पकड़ है। वह अपने वोटरों का गणित पहले ही लगा लेते हैं। साथ ही सीनेट के चुनाव बार-बार स्थगित करने का प्रभाव भी परिणामों पर पड़ा है। इसी कारण कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी विजयी हुए।
भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की हार के कारण
भाजपा समर्थित प्रत्याशियों की हार का कारण गुटबाजी को माना जा रहा है। कई गुटों में यहां भाजपा के लोग बंटे हैं, कुछ इस वर्ग के लोग दूसरे दलों के प्रत्याशियों के लिए वोट मांगते नजर आए। भाजपाई जब तक एक नहीं दिखेंगे तब तक संकाय वर्ग पर काबिज होना मुश्किल माना जा रहा है। एक कारण हार का यह भी माना जा रहा है कि भाजपा के सदस्यों को अपने वोटरों की पहचान नहीं है। वह चुनाव से एक दिन पहले का गणित नहीं लगा पाए। हालांकि भाजपा के अपने वोटर गिनती के हैं।