चंडीगढ़ पीजीआई में जिस बेहोशी की दवा से मरीजों की जान जाने के मामले सामने आए हैं, उसी बैच की प्रोपोफाल दवा के इस्तेमाल से जीएमसीएच-32 में भी दो मरीजों की हालत बिगड़ी थी। दोनों ही जगहों पर एक ही कंपनी से बेहोशी की दवा की आपूर्ति होने की बात सामने आ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि जीएमसीएच-32 में इसकी आपूर्ति सरकारी स्तर पर की गई थी जबकि पीजीआई में उसे निजी दवा की दुकान से खरीदा गया था।
पीजीआई में प्रोपोफाल दवा के इस्तेमाल से पांच मरीजों की जान जाने के मामले पर जांच शुरू कर दी गई है। पीजीआई प्रशासन की ओर से नामित विशेषज्ञों की टीम घटना की क्लीनिक जांच में जुटी हुई है जबकि पीजीआई प्रशासन ने इमरजेंसी स्थित दवा की दुकान को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। क्योंकि जिस बेहोशी की दवा प्रोफोपाल के प्रयोग से मौत की आशंका जताई जा रही है वह उसी दुकान से बेची गई थी। वहीं उस दवा के बैच का नमूना लेकर कोलकाता स्थित लैब में जांच के लिए भेजा गया है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने उस बैच की दवाओं की बिक्री पर रोक लगाकर बचे हुए स्टॉक जब्त कर लिए हैं।
प्रोपोफाल दवा के इस्तेमाल से मौत का मामला पहले भी सामने आ चुका है इसलिए ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए आईएमए ने सरकार को लिखा है, ताकि दवाओं की आपूर्ति की प्रक्रिया पर बारीकी से जांच की जाए। -डॉ. विवेक मल्होत्रा, सचिव आईएमए चंडीगढ़